दो अप्रैल यानी आज विश्व ऑटिज्म दिवस है। राजधानी देहरादून के जिला चिकित्सालय के मनोरोग विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह 20 बच्चे ऑटिज्म से पीड़ित पहुंच रहे हैं।
ऑटिज्म से पीड़ित बच्चे भी समाज का हिस्सा होते हैं। आसमान इन सितारों का भी होता है। इन बच्चों को जुबान से संबोधन में भले ही वक्त लगे लेकिन जीवन में दिशा सही मिले तो इनके इशारे ही एक दिन दुनिया को बड़ा संदेश दे सकते हैं। जिला व दून अस्पताल के चिकित्सक भी इन दिनों इन बच्चों के इलाज के साथ-साथ माता पिता की काउंसलिंग भी कर रहे हैं।
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पिछले साल आई एक बॉलीवुड फिल्म ने भी समाज को कुछ इसी तरह का संदेश देने का प्रयास किया था। दो अप्रैल को विश्व ऑटिज्म दिवस ऐसे ही बच्चों के लिए समर्पित है। राजधानी के जिला चिकित्सालय के मनोरोग विभाग की ओपीडी में हर सप्ताह 20 बच्चे ऑटिज्म से पीड़ित पहुंच रहे हैं।
राजकीय दून मेडिकल कॉलेज चिकित्सालय के बाल रोग विभाग की ओपीडी में भी हर सप्ताह दो से तीन मरीज पहुंच रहे हैं।जिला अस्पताल की वरिष्ठ मनोरोग विशेष डॉ. निशा सिंगला के मुताबिक ऑटिज्म पीड़ित बच्चों को बोलने में दिक्कत आती है।
आमतौर पर इसके लक्षण तब सामने आते हैं जब बच्चा तीन महीने का हो जाता है। अगर बच्चा मुस्कान नहीं देता है या छह महीने में मां या पा नहीं बोल पाता है तो उसमें ऑटिज्म की शिकायत हो सकती है। इसके अलावा वह एक ही गतिविधि की पुनरावृत्ति करता रहता है। साथ ही दूसरे बच्चों से अलगाव भी रखता है।