राजपुर रोड के किशनपुर क्षेत्र में स्थित करोड़ों रुपये मूल्य की संपत्ति को कथित रूप से जाली दस्तावेज के माध्यम से कब्जाने का प्रयास किया गया है।शिकायतकर्ता राजेश माकिन की तहरीर पर राजपुर थाना पुलिस ने बिजनौर निवासी आबिद बेग के खिलाफ धोखाधड़ी, जालसाजी और फर्जी सरकारी रिकॉर्ड तैयार करने के आरोप में प्राथमिकी की है। एसओ पीडी भट्ट ने बताया कि शिकायतकर्ता राजेश माकिन के चाचा रोशन लाल माकिन ने वर्ष 1957 में भारत सरकार से निष्क्रांत संपत्ति के रूप में यह भूमि खरीदी थी। संपत्ति का मालिक पाकिस्तान जा चुका था। लिहाजा यह संपत्ति भारत सरकार के स्वामित्व में आ गई थी। चाचा के निधन के बाद वसीयत के आधार पर संपत्ति परिवार के नाम दर्ज हुई और वर्ष 2019 में इसे अन्य लोगों को बेच दिया गया। वर्तमान में खरीदार इस संपत्ति पर कब्जे में हैं। आरोप है कि आबिद बेग और उसके पिता युनूस बेग ने राजस्व अभिलेखों में फर्जी प्रविष्टियां कराकर अपना नाम दर्ज करा लिया। शिकायतकर्ता का दावा है कि फॉरेंसिक जांच में इन प्रविष्टियों को पहले ही फर्जी पाया जा चुका है। साथ ही, वर्ष 2015 में जिलाधिकारी कार्यालय के रिकॉर्ड रूम से संबंधित खतौनी गायब होने का मामला भी सामने आया था, जिसकी रिपोर्ट शहर कोतवाली में दर्ज की गई थी।मामले में यह भी आरोप लगाया गया है कि संपत्ति पर अधिकार जताने के लिए वर्ष 1947 की एक कथित उर्दू वसीयत अदालत में पेश की गई, जबकि संबंधित व्यक्ति विभाजन के समय पाकिस्तान चला गया था और उसकी संपत्ति सरकार के अधीन चली गई थी। जांच में यह भी सामने आया कि जिस स्टाम्प पेपर पर वसीयत तैयार दिखाई गई, वह मूल रूप से किरायानामा बनाने के लिए खरीदा गया था। शिकायतकर्ता ने यह भी आरोप लगाया है कि वारिस होने के समर्थन में प्रस्तुत खानदानी शजरे को जिन संस्थानों से प्रमाणित बताया गया, उन्होंने सूचना के अधिकार के तहत ऐसे किसी प्रमाणन से इनकार कर दिया। पुलिस का कहना है कि सभी दस्तावेजों और आरोपों की गहन जांच की जा रही है तथा साक्ष्यों के आधार पर आगे की कार्रवाई की जाएगी।