पड़ताल में पता चला कि सरकारी डाक्टर शाम को खुद निजी अस्पताल में जाकर सर्जरी करती रही। हरिद्वार में मिले एक मामले में हायर सेंटर में रेफर करने के नाम पर झबरेड़ा स्थित एक निजी क्लीनिक में मरीजों को रेफर किया जा रहा था।
इसी तरह पकड़ में आए एक अन्य मामले में सरकारी विशेषज्ञ डाक्टर मरीज को इलाज के लिए जिस क्लीनिक में रेफर कर रहा था, वहां वो खुद इलाज करता था, जिससे क्लीनिक को मोटे बिल का भुगतान हो रहा था।
इस तरह की गड़बड़ी वाले कुल 60 लाख रुपये के मामले सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार स्वास्थ्य विभाग ने इसकी रिपोर्ट स्वास्थ्य सचिव नीतेश झा को भेज दी है। सचिव ने सभी मामलों पर कड़ी कार्रवाई के निर्देश जारी किए हैं। इन प्रकरणों में निजी संस्थानों पर रिकवरी की कार्रवाई के साथ सरकारी डाक्टरों पर भी गाज गिरेगी।