केस -1
पटेल नगर निवासी अरविंद कुमार का कहना है कि उनके परिवार का राशन कार्ड वर्ष 2016 में बना है। योजना में गोल्डन कार्ड बनाने के लिए जन सेवा केंद्र और सरकारी अस्पताल में गया। पंजीयन करने पर उनका राशन कार्ड नंबर स्वीकार नहीं हुआ है। बताया गया कि योजना में वर्ष 2015 से पहले के राशन कार्ड का ही डाटा उपलब्ध है।
केस - 2
दून अस्पताल में पथरी से संबंधित बीमारी के इलाज के लिए आए रोहित सिंह का कहना है कि कई बार संपर्क करने के बाद भी अभी तक उनका गोल्डन कार्ड नहीं बन पाया है। एक तरफ सरकार सभी को कैशलेस इलाज देने की बात कह रही है। वहीं, राशन कार्ड होने पर भी आयुष्मान कार्ड नहीं बन रहा है। रोहित का कहना है उनके पास कार्ड होता तो किसी निजी अस्पताल में कैशलेस इलाज मिल जाता। उनके पास इतने पैसे नहीं है कि प्राइवेट में इलाज करा सके।
आयुष्मान योजना में गोल्डन कार्ड बनवाने के लिए राशन कार्ड और आधार कार्ड होना जरूरी है। योजना में खाद्य एवं आपूर्ति विभाग ने 2015 से पहले के राशन कार्डों का डाटा लिया है। इसके बाद बने राशन कार्ड स्वीकार नहीं हैं। यदि कोई व्यक्ति राज्य का स्थायी निवासी है तो उसे अन्य प्रमाण देने पर योजना का लाभ मिल सकता है।
- डॉ.अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक (प्रशासन), राज्य अटल आयुष्मान योजना
60 प्रतिशत परिवारों के बने गोल्डन कार्ड
प्रदेश में आयुष्मान योजना शुरू होने से लेकर अब तक 60 प्रतिशत परिवारों के गोल्डन कार्ड बने हैं। लाभार्थियों की संख्या के आधार पर 32.87 लाख लोगों के कार्ड बन चुके हैं। गोल्डन कार्ड बनाने के लिए सरकार से सरकारी अस्पतालों में आरोग्य मित्र भी तैनात किए हैं। जिनके माध्यम से गोल्डन कार्ड बनाए जा रहे हैं।