अटल आयुष्मान योजना में पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज कराने के लिए मरीजों के पास गोल्डन कार्ड होने के बावजूद भी अस्पताल चांदी काट रहे हैं। अस्पतालों ने कार्ड के आधार पर मरीज का इलाज तो किया, लेकिन इलाज पर जो खर्चा हुआ है, उसकी वसूली मरीज और तीमारदारों से कर ली। यही नहीं मरीज का कैशलेस इलाज दिखा कर सरकार से भी क्लेम ले लिया है। राज्य अटल आयुष्मान योजना की एंटी फ्राड कमेटी की जांच में कई निजी प्राइवेट अस्पतालों में इस तरह के मामले पकड़े गए।
केंद्र और प्रदेश सरकार अटल आयुष्मान योजना में गोल्डन कार्ड धारकों को पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज की सुविधा प्रदान कर रही है। योजना के तहत बीमारों इलाज उपलब्ध कराने के लिए प्रदेश में 167 सरकारी और निजी अस्पताल सूचीबद्ध हैं। योजना में अनुबंध के अनुसार सूचीबद्ध अस्पतालों को मरीज का पांच लाख रुपये तक कैशलेस इलाज करना है। इसमें सर्जरी से लेकर दवाइयां, जांच सब कुछ शामिल है। अस्पतालों को मरीज के इलाज पर होने वाले खर्च का क्लेम सरकार से लेना होता है, लेकिन सूचीबद्ध अस्पतालों ने ही गोल्डन कार्ड धारक मरीजों से चांदी काटी है। अस्पतालों ने कार्ड के आधार पर मरीज को इलाज की सुविधा तो दी, लेकिन मरीज को डिस्चार्ज करते समय इलाज का पूरा खर्च वसूला और सरकार से भी क्लेम लिया। वहीं, मोटी कमाई के लिए अस्पतालों ने सामान्य बीमारी के मरीजों को इमरजेंसी में भर्ती कर लिया। राज्य आयुष्मान योजना की एंटी फ्राड कमेटी ने जांच में कार्ड धारक मरीज से इलाज का पैसा वसूलने के मामलों का खुलासा हुआ है।