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अस्पताल ने फर्जी तरीके से हड़पा क्लेम, अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना की सूची से निलंबित 

Thu, 06 Jun 2019 10:05 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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प्रतीकात्मक - फोटो : social media
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एक सामान्य अस्पताल ने खुद को मेडिकल कॉलेज बताकर अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना के तहत 26 लाख रुपये का क्लेम हड़प लिया। जांच हुई तो हरिद्वार के आरोग्यम मेडिकल कॉलेज और इसके अस्पताल में तमाम गड़बड़ियां पकड़ी गईं। अस्पताल में फर्जी तरीके से मरीजों को भर्ती कर ऑपरेशन किया गया। इसके साथ ही सामान्य बीमारियों में भी क्लेम की बड़ी राशि हासिल की गई।

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जांच में ही पता चला कि यह कथित मेडिकल कॉलेज एमसीआई से मान्यता प्राप्त भी नहीं है। योजना के निदेशक ने मेडिकल कॉलेज को संबद्ध अस्पतालों की सूची से हटाते हुए कारण बताओ नोटिस भी भेजा है। मेडिकल कॉलेज को इस नोटिस का जवाब 15 दिन के भीतर देना होगा। योजना के निदेशक (प्रशासन) डॉ. अभिषेक त्रिपाठी ने बताया कि हाल ही में अस्पताल की ओर से जो क्लेम प्रस्तुत किए गए थे, उन्हें रोक दिया गया है। 

बिना अनुमति के ही कर डाली सर्जरी 
योजना में शामिल होने के बाद अस्पताल में 22 मई तक 18 मरीज ऐसे रहे जिनकी सर्जरी बिना प्री ऑथ अप्रुवल (योजन के तहत अनुमति) के ही कर दी गई। अस्पताल को किसी पैकेज विशेष में इलाज से पहले पोर्टल के माध्यम से मंजूरी लेनी होती है। इसके बाद ही सर्जरी या अन्य इलाज किया जाता है। डॉ. त्रिपाठी के अनुसार यह असंभव है कि बिना मंजूरी सर्जरी कर दी गई और फिर क्लेम भी प्रस्तुत कर दिया गया। इनमें से 17 मरीजों का इलाज दर्शाकर अस्पताल ने कुल 3.37 लाख रुपये क्लेम के रूप में हासिल किया। जबकि, एक मरीज का 25 हजार रुपये अभी जारी नहीं किया गया है। 
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भर्ती करने के बाद में रेफरल पर्ची 
अस्पताल ने जल्दबाजी में इतना फर्जीवाड़ा किया कि अब जांच में बुरी तरह से फंस गया। यहां दो मरीजों को भर्ती होने के बाद रेफरल पर्ची दी गई। पंकज वर्मा नाम के मरीज को 29 मार्च को अस्पताल में भर्ती किया गया था। जबकि, उसके पास जो इमली खेड़ा सीएचसी की रेफरल स्लिप थी उसमें तारीख एक अप्रैल अंकित थी। इसी तरह से गौमती नाम की महिला को सीएचसी भगवानपुर से 11 जनवरी को रेफर किया गया, लेकिन गौमती नौ जनवरी को ही आरोग्यम मेडिकल कॉलेज व अस्पताल में भर्ती थीं।

26 लाख देकर पता चली अस्पताल की असलियत
सरकार की महत्वाकांक्षी आयुष्मान उत्तराखंड योजना में प्राइवेट अस्पताल सिस्टम की सुस्ती का ही गलत फायदा उठा रहे हैं। हरिद्वार के आरोग्यम मेडिकल कॉलेज व अस्पताल की असलियत पता किए बगैर ही उसे सूचीबद्ध कर लिया गया। अब असलियत सामने आई तो पता चला कि अस्पताल क्लेम के रूप में 26 लाख रुपये डकार चुका है। हालांकि, अब इस राशि को वापस करने के निर्देश दिए गए हैं। 
रेगुलर ऑडिट में अस्पतालों के कारनामे लगातार सामने आ रहे हैं। आरोग्यम मेडिकल कॉलेज एवं अस्पताल ने खुद को मेडिकल कॉलेज व अस्पताल बताया था। लेकिन अब जांच हुई तो पता चला कि यह एक साधारण अस्पताल मात्र है। इसके संचालकों ने अस्पताल के बाहर केवल लोगों को प्रभावित करने के लिए मेडिकल कॉलेज लिखा हुआ है। इससे स्पष्ट है कि अस्पताल को सूचीबद्ध करने से पहले कोई जांच नहीं की गई। 

इससे पहले भी आए मामले सामने 
- रामनगर के एक अस्पताल का मालिक सरकारी अस्पताल में संविदा पर काम करता था और उसने अपने अस्पताल में भी खुद को डॉक्टर दर्शाया हुआ था। यह बात भी बाद में जांच के दौरान पता चली, लेकिन तब तक डॉक्टर के निजी अस्पताल के खाते में लाखों रुपये क्लेम के जा चुके थे। 
- हरिद्वार जिले की एक सीएचसी में तैनात डॉक्टर ने खुद को प्रिया अस्पताल का फुल टाइम डॉक्टर दर्शाया हुआ था। यह बात भी कई माह की जांच के बाद पता चली। बाद में प्रिया अस्पताल के खिलाफ कार्रवाई की गई। 

उस वक्त तक पता नहीं था कि आरोग्यम मेडिकल कॉलेज नहीं है। शुरूआत में खुद को उसने अस्पताल के रूप में ही दर्शाया था। चूक कहां है इसका पता लगाया जा रहा है।
-डॉ. अभिषेक त्रिपाठी, निदेशक अटल आयुष्मान उत्तराखंड योजना

एक डॉक्टर और धड़ाधड़ ऑपरेशन 
आरोग्यम अस्पताल प्रबंधन ने जालसाजी करने में कोई कोर कसर नहीं छोड़ी। अस्पताल ने सूचीबद्ध होने के समय जानकारी दी थी कि उसके पास एक जनरल सर्जन और एक निष्चेतक की टीम मौजूद है। यही टीम सर्जरी करती है। जांच टीम ने जब अस्पताल में दस्तावेज जांचे तो पता चला कि चार फरवरी को अकेले डॉक्टर ने छह घंटे के भीतर चार और 18 फरवरी को आठ घंटे में आठ लैप्रोस्कोपिक सर्जरी की। 

ईएनटी डॉक्टर नहीं, लेकिन सर्जरी हुई 
अस्पताल में कई सर्जरी नाक कान गले की भी हुई, लेकिन अस्पताल ने अपने यहां कोई ईएनटी सर्जन या अन्य चिकित्सक होने के बारे में कोई जानकारी नहीं दी। अस्पताल में कुल 43 मामले ईएनटी सर्जरी के आए।

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