नगर निगम हरिद्वार में जमीन खरीद के पूरे मामले में फिलहाल विपक्षी दलों ने किसी प्रॉपर्टी डीलर की संलिप्तता की बात कही है। यह अलग बात है कि उस नाम को लेकर कोई साक्ष्य अभी तक किसी ने नहीं पेश किया है।
अब जानकार यह बता रहे हैं कि किसी का नाम जुड़ा है तो निश्चित तौर पर इसमें संलिप्तता तो सामने आनी ही चाहिए। वहीं एक प्रकरण और जोरों पर है, इसमें बताया जा रहा है कि नगर निगम हरिद्वार क्षेत्र के मध्य हिस्से में दो दुकानें जो निगम ने किराये पर दी थी इसे भी बेच दिया गया है। अगर इस तरह के मामले हैं तो इनका भी खुलासा जांच एजेंसियों को करना होगा। एक अहम सवाल कि रिंग रोड का लगभग 83 करोड़ का मुआवजा, दुकानों को बेचने में मिले प्रत्येक से करीब 56 लाख रुपये यह रुपये कहां गए। इन सभी यक्ष प्रश्न के बीच अब खुलकर सामने आ रहे मुद्दों को लेकर स्वयं वर्तमान के जिम्मेदार भी परेशान हैं।