शादी टूटने की एक वजह ये भी : आचार्य राजेश
आचार्य राजेश महाराज ने कहा कि कुंडली में सत्यमें भाव में आवेश पर शुक्र, मंगल, राहु का प्रभाव पड़ता है तो शादी टूट जाती है। जब शादी के लिए कुंडली मिलाते हैं तो खास तौर पर 22वें व 64वें नवांश पर नक्षत्रों के प्रभाव को विशेष रूप से देखा जाना चाहिए।
गुण मिलते हैं फिर भी टूट जाती है शादी : कविता
ज्योतिषी कविता चैतन्य का कहना है कि कुंडली में लड़के और लड़की के 28 गुण मिलते हैं। बावजूद इसके शादी टूट जाती है। दोनों की कुंडली में अष्टमेश एक नक्षत्र में हो तो गुण भी साथ नहीं देता है। जन्म की दशा में सप्तमेश, अष्टमेश का एक-दूसरे के कुंडली में संबंध देखना जरूरी है।
गुण-दोष के साथ मन का मिलना भी जरूरी : पं. अजय भांबी
जीवनसाथी केे चयन में अमीर लड़का या सुंदर लड़की के चक्कर में नहीं पड़ना चाहिए। दो युवक-युवती दंपती बनना चाहते हैं। उनका मन कितना मिलता है, यह सबसे जरूरी है। ज्योतिष की दुनिया में भी कुंडली के गुण-दोष की परंपराओं के साथ अब 21वीं सदी में विवाह संबंधों को नए दृष्टिकोण से देखने की जरूरत है।
पंडित अजय भांबी ने कहा कि बेटी पैदा होने के साथ ही हम उसकी मानसिकता तैयार करना शुरू कर देते हैं। उसे बड़ा होकर दूसरे घर जाना है। जब वह विदा होती है तो उसे अहसास कराया जाता है कि दूसरे घर में मृत्यु तक रहना है। अब जमाना बदल गया है। इन परंपरागत बातों को भी बदलने की जरूरत है। जीवनसाथी की तलाश में मन पर जोर देना है। गुण सूत्र अगर कम भी मिलते हैं तो कोई बात नहीं, मन का मिलना जरूरी है। उन्होंने कहा कि अगर पुरुष और महिला का शनि मिलता है तो वह हर बात में साथ खड़े रहेंगे। अगर दोनों के मंगल में कनेक्टिविटी है तो परिवार में नया बदलाव देखने को मिलेगा।
मैंने प्रेम विवाह किया और केवल तीन गुण मिलते थे
पंडित अजय भांबी ने कहा कि उन्होंने प्रेम विवाह किया था। उनके केवल तीन गुण मिलते थे। लेकिन, मन यानी दूसरे सूत्र मिलते थे। सूर्य से सूर्य की मैत्री यानी आत्मा की मैत्री होती है। उन्होंने कहा कि इसी तरह मन मिलना चाहिए।