इसका कुल भुगतान 33 हजार रुपये होना था। इस भुगतान को लेने पर जब वह वरिष्ठ अकाउंटेंट के पास पहुंचा तो उन्होंने चेक सहायक अकाउंटेंट दयाल सिंह रावत से लेने की बात कही।
दयाल सिंह ने चेक देने के बदले तीन हजार रुपये मांगे। इसके बाद ठेकेदार विनोद चौहान ने रुपये मांगने की शिकायत विजिलेंस में कर दी। इसके बाद विजिलेंस टीम ने 11 जुलाई 2007 को दयाल सिंह को रिश्वत लेते समय रंगे हाथ गिरफ्तार कर लिया।
अदालत ने सुनाई के बाद दयाल सिंह रावत को दोषी पाते हुए भ्रष्टाचार निरोधक अधिनियम की अलग अलग धाराओं में चार-चार वर्ष के कठोर कारावास की सजा सुनाई है। इसके अलावा कुल 10 हजार रुपये जुर्माना भी लगाया है।