नारी निकेतन में बलात्कार के चलते संवासिनी के गर्भवती होने, फिर गर्भपात कराने के मामले में वहशियों की गिरफ्तारी सोमवार को हो सकती है।
जज के महिला अस्पताल जाकर पीड़िता के कलमबंद बयान (धारा 164 सीआरपीसी) दर्ज करने के साथ ही पुलिस ने कार्रवाई को अमलीजामा पहना दिया है। सूत्रों के मुताबिक नारी निकेतन के होमगार्ड, सफाई कर्मचारी समेत तीन कर्मचारी सलाखों के पीछे जा सकते हैं।
शनिवार को मूक बधिर संवासिनी ने होमगार्ड के फोटो पर उंगली रखकर शिनाख्त की थी, लेकिन रविवार को दो अन्य कर्मचारियों के हवस का शिकार बनाने की बात उजागर होने के बाद मामला और संगीन हो गया है। करीब 12 दिनों से हर किसी की निगाह नारी निकेतन के संबंध में चल रही कार्रवाई पर टिकी है।
17 नवंबर को संवासिनी के दुराचार और गर्भपात की जानकारी फैक्स से अमर उजाला को मिली थी। अमर उजाला में खबर प्रकाशित होने के बाद से अब तक कई उतार-चढ़ाव आए, लेकिन आखिरकार आरोपी कानूनी चक्रव्यूह में फंस गए। शनिवार को पीड़ित संवासिनी ने होमगार्ड की तस्वीर पर उंगली रखकर पुलिस की मुश्किल आसान की थी।
रविवार को अपनी कार्रवाई को पुख्ता करने के लिए पुलिस ने पीड़िता के 164 के तहत बयान कलमबंद करा दिए। पीड़िता के बयानों का विवेचक ने अवलोकन तो कर लिया है, लेकिन सत्यापित कॉपी सोमवार को मिलने की उम्मीद है।
इसके बाद पुलिस अपनी कार्रवाई को अंजाम देने की तैयारी में है। वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक सदानंद दाते ने एसपी सिटी अजय सिंह और एसआईटी टीम के साथ मंत्रणा कर कार्रवाई की पूरी तैयारी कर ली है।
नारी निकेतन मामले की विवेचना निर्णायक दौर में पहुंच गई है, जिसमें कुछ नए तथ्य आए हैं। 164 के बयान की सत्यापित कॉपी मिलने के बाद कार्रवाई अमल में लाई जाएगी। आरोपी अब कानून से ज्यादा दूर नहीं है।
- डॉ. सदानंद दाते, वरिष्ठ पुलिस अधीक्षक
करीब दो घंटे में कलमबंद हुए संवासिनी के बयान
नारी निकेतन में बलात्कार के चलते संवासिनी के गर्भवती होने, फिर गर्भपात कराने के मामले में पीड़ित संवासिनी के बयान कलमबंद करने की प्रक्रिया रविवार को दो घंटे में पूरी हुई। साइन लैंग्वेज की तीन महिला एक्सपर्ट ने पीड़िता के सांकेतिक भाषा को समझकर बयान दर्ज कराए।
संवासिनी के बयान दर्ज कराने के लिए महिला चिकित्सालय में सुबह से ही पुलिस की चहल-कदमी बढ़ गई थी। एसपी सिटी अजय सिंह ने अस्पताल पहुंचकर परामर्श एवं प्रशिक्षण केंद्र में होने वाले बयान के लिए सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया।
कड़ी सुरक्षा में दस बजकर पचास मिनट पर न्यायिक मजिस्ट्रेट प्रथम सिमरनजीत कौर की मौजूदगी में पीड़िता के (धारा 164 सीआरपीसी) के बयान कलमबंद करने की प्रक्रिया शुरू हुई। मूक बधिर के इशारों और हाव-भाव के जरिये मौजूद रही तीन महिला एक्सपर्ट पीड़िता की बात न्यायिक मजिस्ट्रेट को बताती रहीं।
करीब दो घंटे चली यह प्रक्रिया 12 बजकर 40 मिनट पर पूरी हुई। सरकारी कैमरामैन से पूरी कार्रवाई की वीडियोग्राफी भी कराई गई। इस दौरान एसआईटी की महिला पुलिसकर्मी सुरक्षा की दृष्टि से प्रशिक्षण केंद्र के बाहर मौजूद रहीं।
एसएसपी सदानंद दाते ने बताया कि विवेचक कविता जोशी ने बयान का अवलोकन कर लिया है, लेकिन सत्यापित कॉपी सोमवार को मिल पाएगी। इसके बाद पीड़िता के बयान की सही जानकारी हो पाएगी।