उत्तराखंड के कोटद्वार में पूर्व सैनिक सेवा परिषद के बैनर तले केदारघाटी के आपदा पीड़ितों और पूर्व अर्द्धसैनिकों की समस्याओं के समाधान के लिए धरना प्रदर्शन तीसरे दिन भी जारी रहा। क्षेत्र के विभिन्न संगठनों ने धरना स्थल पर पहुंचकर समर्थन दिया।
सरकार को बताया फेलियर
बृहस्पतिवार को तहसील परिसर में धरने के दौरान आयोजित पूर्व सैनिकों की सभा में वक्ताओं ने प्रदेश सरकार को आपदा में फेलियर करार दिया।
कहा कि आपदा के दौरान अगर सेना नहीं होती तो किसी भी यात्री का बच पाना मुश्किल था। सेना के जवानों ने अपनी वीरता का परिचय देते हुए हजारों यात्रियों की जान बचाई थी।
फिर से आपदा जैसे हालात
एक साल बाद फिर वैसे ही हालात पैदा हो रहे हैं, मगर सरकार ने पिछली आपदा से सबक नहीं लिया। ऐसे में केदारघाटी के नागरिकों, आपदा प्रभावितों और यात्रियों की व्यवस्थाएं सेना को सौंपी जानी चाहिए।
सरकार पर लगाया उपेक्षा का आरोप
अर्द्धसैनिक संगठन के पदाधिकारियों ने केंद्र और प्रदेश सरकार पर उनकी उपेक्षा का आरोप लगाया। कहा कि सेना के साथ वे भी देश के लिए अपना सर्वस्व न्योछावर कर रहे हैं। मगर, उनके साथ भेदभाव किया जा रहा है।
कहा कि केंद्र को सेना के समान उन्हें और उनके आश्रितों को सुविधाएं देनी चाहिए। पूर्व सैनिक संगठन के पदाधिकारियों ने कहा कि क्षेत्र में प्राइवेट विद्यालयों की मनमानी के कारण पूर्व सैनिकों को परेशानियों का सामना करना पड़ रहा है।
कोटद्वार में केंद्रीय विद्यालय खुलने से लोगों को कम फीस पर गुणवत्तापूर्ण शिक्षा मिलेगी।