मंगलवार को सेना की एक टुकड़ी जवान का शव लेकर यहां पैतृक आवास पहुंची। जवान का शव देख घर पर कोहराम मच गया। बदहवास, रोती-बिखलती मां पार्वती और पत्नी गीता को लोगों ने सांत्वना दी। जवान की मौत की खबर फैली तो घर पर शोक संवेदना जताने वालों का तांता लग गया। इसके बाद घर से शव यात्रा निकाली गई। अंतिम यात्रा में क्षेत्रवासियों की भीड़ उमड़ पड़ी। संगम पर कौसानी सिग्नल कोर के जवानों ने सलामी दी। जवान की सैन्य सम्मान के साथ अंत्येष्टि की गई। चिता को बेटे सुनील और मनोज ने मुखाग्नि दी। उनका बड़ा बेटा 22 और छोटा 19 साल का है।
सेना में दूसरी नौकरी कर रहे थे हरीश
डीएससी के जवान हरीश भारतीय सेना में दूसरी नौकरी कर रहे थे। इससे पहले वह कुमाऊं रेजीमेंट में कार्यरत थे। वर्ष 2016 में हवलदार के पद से सेवानिवृत्ति के बाद वह डीएससी में चले गए। यहां बोरगांव स्थित पैतृक घर पर मां, पत्नी और दो बेटे रहते हैं। पिता का कुछ बरस पहले देहांत हो गया था। उनके पिता भी भारतीय सेना में थे। ब्यूरो