फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

पति की शहादत के 50 साल बाद बीवी को 'पेंशन'

Wed, 04 Feb 2015 09:03 AM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
शहीद पति हवलदार माधो सिंह की शहादत के 50 वर्ष बाद वीर नारी कलावती को उनकी सही पेंशन का हक मिल पाया है।
विज्ञापन


एक सैन्य ऑपरेशन में वर्ष 1964 में शहीद हुए हल्द्वानी के एसके पुरम ग्राम सभा हरीनगर कुसुमखेड़ा के हवलदार माधो सिंह की पत्नी कलावती को सामान्य वीर नारी की पेंशन मिलती रही जबकि वह उदारीकृत पेंशन (सैन्य ऑपरेशन में शहीद के परिजनों को मिलने वाली पेंशन) की हकदार थीं।

पहाड़ के ग्रामीण परिवेश में रहीं कलावती को इस बात की जानकारी भी नहीं थी कि उन्हें उदारीकृत पेंशन मिलनी चाहिए। सैनिक कल्याण विभाग के पेंशन संबंधित अभियान से उनके परिवार को यह जानकारी मिली।
विज्ञापन


कलावती के दामाद दिवान सिंह ने मामले में सैनिक कल्याण विभाग से संपर्क साधा, जिसके बाद उन्हें बढ़ी हुई पेंशन तो मिली ही साथ ही एरियर भी मिल गया।
विज्ञापन

पति की मौत के बाद नहीं हारी ‌हिम्मत

निदेशक सैनिक कल्याण ब्रिगेडियर एएन बहुगुणा ने बताया कि वीर नारी की सही पेंशन संबंधी समस्या जिला सैनिक कल्याण अधिकारी मेजर बीएस रौतेला (रिटायर्ड) के पास आई थी। मेजर रौतेला ने त्वरित करवाई की, जिसके बाद उनको बकाया पेंशन भुगतान के साथ मान्य पेंशन भी मिल गई।

11 लाख का हुआ भुगतान
वीर नारी कलावती को सामान्य पेंशन मिल रही थी। सैन्य आपरेशन में शहीद की विधवा को उदारीकृत पेंशन के हिसाब से 11 लाख रुपए का एरियर बनता था।

पेंशन का आकलन बैंक के स्तर से सही नहीं हो पाया था जबकि रिकार्ड में उन्हें शहीद की पत्नी के लिए पेंशन ही स्वीकृत थी। सैनिक कल्याण विभाग के मामले में कार्यवाही करने पर उनको बैंक से बकाया भुगतान हुआ।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें