गुरुवार को हुए विधानसभा सत्र में आखिरकार केंद्रीय मंत्री नितिन गड़करी का चिट्ठी बम फूट ही गया। उनकी चिट्ठी पर चर्चा कब बहस और आक्रोष में तब्दील हो गई यह खुद सभा में मौजूद मंत्री भी नहीं समझ पाए। मामला बढ़ा तो सीएम से लेकर मंत्रियों के भी होश उड़ गए।
जैसा कि पहले से तय था, विधानसभा सत्र का पहला दिन नेशनल हाईवे-74 के घोटाले के नाम रहा। सत्र आरंभ करने के लिए विधानसभा अध्यक्ष अपनी कुर्सी पर आकर बैठे ही थे, कि नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश नियम-310 के तहत एनएच-74 के संबंध में सरकार के जबाव देने को लेकर अड़ गईं।
जमकर शोर-शराबा हुआ और आखिरकार एनएच घोटाले पर लंबी चर्चा हुई। इस दौरान दोनों तरफ से जमकर शब्द बाण छोड़े गए। गडकरी की चिट्ठी का हवाला देते हुए विपक्ष ने सीबीआई जांच में हीलाहवाली का आरोप लगाया।
बृहस्पतिवार को ठीक 11 बजे सदन की कार्रवाई आरंभ हुई। नेता प्रतिपक्ष ने एनएच-74 घोटाले की सीबीआई जांच से संबंधित नितिन गडकरी की चिट्ठी को दिखाते हुए स्पीकर प्रेमचंद्र अग्रवाल से कार्य स्थगन सूचना को संज्ञान में लेने का अनुरोध किया। स्पीकर ने इसे प्रश्नकाल के बाद लगभग साढ़े बारह बजे पर लाने की बात कही, मगर इंदिरा तत्काल बहस पर अड़ी रहीं।
विपक्ष के सभी विधायक इस मांग को लेकर वेल में आ गए। इसके बाद जमकर नारेबाजी और हंगामा हुआ, जिसके चलते सदन को पंद्रह-पंद्रह मिनट के लिए दो बार स्थगित किया गया।
विपक्ष ने नहीं छोड़ा कोई मौका
पौने बारह बजे जब सदन की कार्रवाई दोबारा शुरू हुई, तो वही स्थितियां दोबारा उत्पन्न हो गईं। भारी हंगामा और शोर-शराबे को देखते हुए स्पीकर ने इंदिरा की मांग को स्वीकार कर लिया। इंदिरा ने एनएच-74 घोटाले में अब तक के पूरे घटनाक्रम को सदन के समक्ष रखते हुए छह सवाल पूछे।
इसमें सीबीआई जांच होने या न होने, कमिश्नर के तबादले और जांच की मौजूदा स्थितियों के बारे में पूछा। संसदीय कार्यमंत्री प्रकाश पंत ने इंदिरा की बात को पकड़कर जबाव दिया कि मामला हाईकोर्ट में विचाराधीन है, इसलिए इस पर कुछ कहना उचित नहीं होगा। विपक्ष ने गडकरी की चिट्ठी दिखाते हुए डबल इंजन की सरकार और जीरो टॉलरेंस की मंशा पर सवाल उठा दिए।
उधर सत्ता पक्ष के विधायकों ने भी हरीश रावत सरकार को कटघरे में खड़ा करते हुए कांग्रेस कार्यकाल में घपला होने की बात कहते हुए पलटवार किया। भाजपा विधायक सुरेंद्र सिंह जीना ने एसबीआई के उस खाते में जमा राशि की जानकारी भी मांग ली, जिसमें मुआवजा पाए किसानों के खाते से पैसा ट्रांसफर होने की बात सामने आई थी।
बाद में कांग्रेस विधायक करण माहरा ने एनएच घोटाले को सामने लाने वाले कुमाऊं कमिश्नर डी. सेंथिल पांडियन को हटाने और राज्य आंदोलनकारियों पर गोली चलवाने वाले अधिकारी एसपी भट्ट को कमिश्नर बनाने पर सवाल खड़ा किया, मगर भाजपा विधायक राकेश शुक्ला ने उसी अधिकारी को कांग्रेस सरकार में लंबे समय तक पौड़ी का डीएम बनाए जाने की बात पूछते हुए जोरदार काउंटर किया। काफी देर तक शोर-शराबे के बीच सदन की कार्यवाही चलती रही। एक बजे भोजनावकाश देकर सदन स्थगित कर दिया गया।