प्रदेश को बहुत जल्द अपार्टमेंट नीति मिलने जा रही है। इसके लिए तेजी से काम चल रहा है। प्रदेश में अपार्टमेंट भवनों के नाम पर चल रहे निर्माण कार्य को सरकार आम आदमी के लिए छलावा मान रही है। इसलिए वह अपार्टमेंट भवनों को बकायदा परिभाषित करते हुए जल्द ही नीति लाने जा रही है।
दूसरी अहम खबर अवैध कालोनियों को रियायत देने से जुड़ी है। रियल एस्टेट रेग्युलेटरी ऑथारिटी (रेरा) के प्रभावी होने के बाद तमाम अवैध कालोनियों का पंजीकरण अटक गया है। इस वजह से बिल्डर और कालोनाइजर से कहीं ज्यादा उन लोगों को दिक्कतें उठानी पड़ रही हैं, जिन्होंने घर के लिए पैसा जमा कराया है। इन स्थितियों के बीच, सरकार इस विकल्प पर गंभीरता से विचार कर रही है कि ऐसी अवैध कालोनियों का एक समय समाधान योजना (वन टाइम सेटलमेंट) में ले लिया जाए और दंड वसूल करते हुए इनका ले-आउट पास कर दिया जाए। प्रदेश सरकार ने पिछले सप्ताह ही भवन निर्माण और विकास उपविधि/विनियम 2011 में आमूलचूल बदलाव करते हुए बडे़ स्तर पर रियायतों को मंजूरी दी थी।
अपार्टमेंट नीति: इस दिशा में आगे बढे़गी सरकार
सामान्य तौर पर किसी भी बहुमंजिली इमारत को अपार्टमेंट मान लिया जाता है, जबकि ये स्थिति सही नहीं है। सरकार अपार्टमेंट नीति तैयार करते हुए जिस दिशा में आगे बढ़ रही है, उसमें कुछ एक बातें बिलकुल साफ हैं। निर्माण के लिए उपलब्ध क्षेत्रफल का 35 फीसदी हिस्सा अनिवार्य तौर पर आवासीय होना चाहिए। शेष 65 फीसदी हिस्से में किसी भी तरह का निर्माण किया जा सकता है। सरकार का मानना है कि अपने भवन निर्माण को अपार्टमेंट दर्शाकर बिल्डर आम लोगों से छलावा करते हैं, जबकि अपार्टमेंट का दायरा इससे कहीं अधिक ज्यादा होता है। सूत्रों के अनुसार, नीति में इन्हीं सब बातों को रखा जा रहा है।
अवैध कालोनी नियमितीकरण : मिलेगा तोहफा
देहरादून समेत कई जिलों में रेरा के प्रभावी होने के बाद आवासीय कालोनी के कई ऐसे प्रोजेक्ट पंजीकृत नहीं हो पा रहे हैं, जिनके ले-आउट विधिवत पास नहीं हैं। बिल्डरों के बहकावे में आकर तमाम लोग इन कालोनियों में अपने घर के लिए पैसा भी जमा करा चुके हैं। सरकार इन कालोनियों को लेकर असमंजस में फंसी है। इन्हें ध्वस्त करने का फैसला आसान नहीं है। इन स्थितियों में, इन कालोनियों के लिए वन टाइम सेटलमेंट पर सरकार विचार कर रही है। इससे सरकार को कपाउंडिंग शुल्क बतौर अच्छा खासा राजस्व मिलेगा और बिल्डर से लेकर आम आदमी तक को रियायत मिल सकेगी।
भवन निर्माण और विकास उपविधि/विनियम 2011 की समीक्षा करते हुए सरकार ने जो भी बदलाव उचित समझे, उन पर आम आदमी के हितों को देखते हुए काम किया जा रहा है। अपार्टमेंट नीति से लेकर अवैध कालोनियों के नियमितीकरण जैसे कई मामलों पर गंभीरता से विचार किया जा रहा है। उचित समय पर फैसले कर लिए जाएंगे। इन फैसलों में जनता का हित सर्वोपरि रखा जाएगा।
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मदन कौशिक, आवास मंत्री, उत्तराखंड