इस दौरान सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। रोज नहाना चाहिए। कपड़े का प्रयोग कतई न करें। सेनेटरी पैड दिन में कम से कम दो से तीन बार बदलना चाहिए। बहुत दर्द या कमजोरी आ रही हो तो डॉक्टर के पास जाएं। उन्होंने बताया कि समय बदल रहा है। बड़े स्तर पर बदलाव के लिए घर से शुरुआत करनी होगी।
इसमें घर के बड़ों की जिम्मेदारी अहम है। खासकर मां की। इस दौरान लड़की या औरत क अशुद्ध होने की भ्रांति को भी दूर करना होगा। इस दौरान छात्राओं ने सवाल पूछकर अपनी स्वास्थ्य संबंधी जिज्ञासा भी शांत की। इसके बाद बोलीं कि अब पीरिसड्स के दौरान शर्माएंगी नहीं और स्वच्छता का ध्यान रखेंगी।
महाअभियान से जागरूक होकर कॉलेज की शिक्षिका सुबोधनी जोशी भी छात्राओं से अपने अनुभवों को साझा करने से खुद को रोक नही पाईं। उन्होंने बताया कि शुरुआत मेें टीवी पर आने वाले सेनेटरी पैड के विज्ञापन के बारे में लोग समझ ही नहीं पाते थे। धीरे धीरे जानकारी हुई तो इसके प्रति जागरुकता भी बढ़ी। अब इसके बारे में सब जानते हैं। इसके इस्तेमाल को लेकर कोई झिझक नहीं करनी चाहिए।