देहरादून। प्रदेश में ग्रेजुएशन में सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने की घोषणा परवान तो नहीं चढ़ी, लेकिन छात्रों के लिए मुसीबत जरूर बन गई है। ज्यादातर कॉलेज और विश्वविद्यालयों में प्रथम और तृतीय सेमेस्टर की पढ़ाई ठप हो चुकी है। प्रकाशकों के पुस्तकें न छापने की वजह से छात्रों के पास किताबें नहीं हैं। सरकार अभी तक इस मसले पर कोई फैसला नहीं ले पाई है।
यूजी में सेमेस्टर सिस्टम के खिलाफ एबीवीपी ने बड़े स्तर पर आंदोलन चलाया था। अगस्त के अंतिम सप्ताह में एबीवीपी ने सचिवालय कूच किया था। इसके बाद सीएम त्रिवेंद्र सिंह रावत से वार्ता की। वार्ता में उन्होंने सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने की घोषणा कर दी थी। अभी तक इस घोषणा पर कोई अमल नहीं हो पाया। इससे छात्र, विवि प्रशासन और शिक्षक परेशान हैं। श्रीदेव सुमन और कुमाऊं विवि में गत वर्ष ही सेमेस्टर सिस्टम लागू हुआ था। यहां दो सेमेस्टर की परीक्षाएं दे चुके छात्र भी अब अगले वर्ष/सेमेस्टर को लेकर असमंजस में हैं।
यहां पड़ रहा इस घोषणा का असर
-श्रीदेव सुमन और कुमाऊं विवि में द्वितीय सेमेस्टर का परीक्षा परिणाम जारी नहीं हुआ। इन छात्रों को चिंता है कि उनका सेमेस्टर सिस्टम होगा या वार्षिक।
-सभी कॉलेजों में प्रथम सेमेस्टर में प्रवेश प्रक्रिया खत्म हो चुकी है। यह छात्र सेमेस्टर की किताबें पढ़ेंगे या विवि अलग से सिलेबस जारी करेगा, यह पता नहीं।
-सेमेस्टर सिस्टम खत्म करने की खबर से बाजार में तृतीय सेमेस्टर की नई किताबें ही नहीं आई। प्रकाशक और बुकसेलर भी परेशान।
-अभी तक आदेश न आने की वजह से प्रथम और तृतीय सेमेस्टर के छात्रों को पढ़ाई का इंतजार। दिसंबर में परीक्षाओं के चलते बढ़ी परेशानी।