दुर्घटना नहीं हत्या थी। इस बात को साबित करने के लिए पुलिस ने डी-एक्सलरेशन की थ्योरी को साबित किया। अंकिता अगर पानी में दुर्घटनावश गिरती तो वह नहर किनारे से टकराती। फिर चाहे उसके शरीर का कोई भी हिस्सा हो। पोस्टमार्टम रिपोर्ट में आया कि अंकिता के शरीर पर कोई जाहिरा चोट के निशान नहीं थे। उसके हाथों पर नील पड़ने का निशान था जो कि केवल किसी के उसे दोनों हाथों से मजबूती से पकड़ने से आया हो सकता है।
डी एक्सलरेशन थ्योरी कहती है कि किसी को जब कोई पानी में जोर से धक्का दे तभी ऐसा हो सकता है कि शरीर कहीं न टकराए और सीधे पानी में गिरे। चूंकि नहर पटरी से पानी काफी नीचे रहता है तो इससे साबित हुआ कि उसे जानबूझकर धक्का दिया गया होगा जिससे वह डूब गई।