सहायक कृषि अधिकारी सुरेंद्र थपलियाल के घर डकैती और उनके बेटे अंकित की हत्या में शामिल चौथा बदमाश अखलाक भी सलाखों के पीछे पहुंच गया है। देहरादून पुलिस ने अखलाक को डोईवाला के तेलीवाला गांव स्थित घर से दबोच लिया।
कोर्ट में पेशी के बाद भेजा जेल
उससे सोने की चेन, अंगूठी और तंमचा और कुछ जिंदा कारतूस बरामद मिले हैं। अखलाक की गिरफ्तारी में एसओ रायपुर अबुल कलाम, एसओजी प्रभारी रवि सैनी, कांस्टेबल चमन, सुनील, ललित व विपिन राणा शामिल रहे। कोर्ट में पेशी के बाद उसे जेल भेज दिया गया।
अब पुलिस उसे रिमांड पर लेने की तैयारी में है। वहीं, सभी बदमाशों पर गैंगस्टर एक्ट लगाने की भी कवायद चल रही है। पुलिस बदमाशों का पुराना रिकार्ड खंगाल रही है। हालांकि, अंकित को गोली मारने वाला अकरम और साजिद पहलवान अब भी फरार हैं।
अखलाक ने ही रची थी साजिश
एसपी सिटी अजय सिंह ने रविवार को बताया कि अखलाक मूलत: हरिद्वार के भगवानपुर का रहने वाला है। दो साल से वह डोईवाला के तेलीवाला में रह रहा था। एसपी ने बताया कि अखलाक ने ही वारदात की साजिश रची थी। उसने ही बाकी सभी बदमाशों को डकैती के लिए दून बुलाया था।
रिश्तेदार हैं बदमाश
एसपी सिटी अजय सिंह का कहना है कि सभी बदमाश रिश्तेदार हैं और यूपी, उत्तराखंड के अलग-अलग जिलों में रहते हैं। अब तक की पूछताछ में मालूम हुआ है कि वारदात को अंजाम देने के लिए सभी किसी एक के घर में जुटते और लूट, डकैती के बाद अपने-अपने घर लौट जाते थे।
चोरी के पैसे बना रेत सप्लायर
अखलाक हरिद्वार के ज्वालापुर में कुछ वर्ष पूर्व चोरी के एक मामले में जेल गया था। जेल से छूटने के बाद वह डोईवाला में बस गया। पूछताछ में पता चला है कि दो साल में उसने गैंग के साथ कई छोटी चोरियां कीं। इनसे मिली रकम से उसने ट्रैक्टर खरीद लिया और ईंट-रेत सप्लायर बन गया।
अकरम, साजिद पकड़ से बाहर
गैंग का सबसे खतरनाक बदमाश अकरम अब भी फरार है। जबकि साजिद पहलवान भी पुलिस की पकड़ से दूर है। अकरम ही गिरोह के सदस्यों को हथियार मुहैया कराता था। अकरम ने ही डकैती के दौरान अंकित को गोली मारी थी।
पुलिस को सूचना मिली है कि अकरम शामली के बुंटो गांव में छिपा हुआ है, लेकिन स्थानीय पुलिस की मदद न मिलने के कारण दून पुलिस वहां कोई कार्रवाई नहीं कर पा रही।