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हरिद्वार में इस बार भी हुई परंपरा के नाम पर बलि

Tue, 08 Apr 2014 09:55 AM IST
अमर उजाला, हरिद्वार
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उत्तराखंड की धर्मनगरी हरिद्वार में जन विरोध के बावजूद दक्षिण काली पीठ पर रविवार की आधी रात दो पशुओं की बलि दी गयी। महा कालरात्रि पूजा रात 12 बजे प्रारंभ हुई और सवेरे चार बजे तक चलती रही।
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वहीं दूसरी ओर पीपुल फॉर एनीमल (पीएफए) उत्तराखंड की सदस्य सचिव गौरी मौलेखी ने आरोप लगाया कि उन्हें धमकाया गया। उन्होंने जिले के अधिकारियों के सहयोग न करने की बात कही।

बलि प्रथा को बंद कराने के लिये पीपुल फॉर एनीमल, षड़दर्शन साधु समाज तथा आश्रम परिषद् सक्रिय हुए थे।

जंगल में जाकर पशु बलि दी

रात तक भी मंदिर प्रांगण में विरोध के स्वर गूंजते रहे। इसके बावजूद परंपराओं का निर्वहन हुआ और रात्रि में दो पशुओं की बलि दी गयी। कुछ लोगों ने अपने अपने स्तर पर नजदीकी वन में जाकर पशु बलि दी।

कालरात्रि में अपनी अपनी साधना करने वाले तांत्रिक और अघोरियों ने चंडी वन में कईं जगह साधना की।

रविवार देर रात संस्था के पदाधिकारियों ने मंदिर परिसर से दो बकरे मुक्त कराए थे। बाद में मुक्त कराए गए बकरों को मंदिर के अनुयायियों ने पुलिस की मौजूदगी में छीन लिया था। पीएफए पदाधिकारियों एवं अनुयायियो के बीच नोंकझोंक भी हुई थी।

मंदिर प्रबंधन के गेट बंद कर देने पर संस्था के पदाधिकारी सोमवार सुबह पांच बजे तक बाहर ही डटे रहे। पीएफए की सदस्य सचिव गौरी मौलेखी ने बताया कि आधी रात को उन्हें जिलाधिकारी डी सेंथिल पांडियन से उनके आवास पर जाकर पशु बलि रुकवाने का अनुरोध किया।

लोगों ने धमकाया

जिलाधिकारी ने एडीएम प्रशासन जीवन सिंह नगन्याल को उनके साथ भेजा। गौरी का आरोप है कि वे मंदिर पहुंच गए, पर अधिकारी रास्ते से गायब हो गए।

पुलिस की मदद से संस्था की सदस्य सचिव गौरी मौलेखी मंदिर कैंपस में पहुंच गई। आरोप है कि चंडीघाट चौकी प्रभारी की मौजूदगी में कुछ लोगों ने उन्हें धमकाया। इस दौरान पुलिस ने उनकी कोई मदद नहीं की।

हालांकि मंदिर प्रबंधन ने किसी को धमकाने के आरोपों को पूरी तरह से नकारा है। मंदिर प्रबंधन का कहना है कि यह बदनाम करने की साजिश है। वहीं प्रशासन ने भी अधिकारी के बीच से गायब होने की बात को नकारा है। प्रशासनिक अधिकारियों का कहना है कि एसडीएम मंदिर के बाहर पूरी रात निगरानी करते रहे।

जारी रहेगा संघर्ष
पीपुल फॉर एनीमल संस्था की डॉ पुनीता वाजपेयी एवं सावक छात्र मंच के कीर्तिकांत त्रिपाठी ने कहा कि बलि प्रथा रोकने के लिये संघर्ष जारी रहेगा। आगामी गुप्त नवरात्रों में बलि न होने पाये, इसके लिये संस्था द्वारा प्रदेश के मुख्य सचिव को पत्र भेजा गया है।

मंदिरों में पशु बलि शास्त्र विरुद्ध: भूमा पीठाधीश्वर

आद्य शंकराचार्य से जुड़ी भूमा पीठ के पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने कहा कि पशु बलि शास्त्र विरुद्ध है। अपनी बात को सिद्ध करने के लिये वे खुले शास्त्रार्थ को तैयार हैं। दक्षिण काली माता मदिरा और बलि चाहती है, ऐसा उल्लेख कहीं नहीं हैं।

यहां तक कि कोलकाता स्थित विख्यात काली मंदिर में भी बलि नहीं दी जाती। भूमा पीठाधीश्वर स्वामी अच्युतानंद तीर्थ ने पत्रकारों से वार्ता करते हुए बताया कि दक्षिण काली को कोलकाता में दक्षेश्वर काली कहा जाता है।

गंगा तट पर स्थित वह सिद्धपीठ रामकृष्ण परमहंस तथा स्वामी विवेकानंद की तपस्थली है। वहां कोई बलि प्रथा विद्यमान नहीं। ऐसे में हरिद्वार के गंगा तट पर दक्षिण काली मंदिर में निरापराध पशुओं की बलि दिया जाना शास्त्र विरोधी है। मठ मंदिरों के अधिष्ठाताओं को शास्त्रों के अनुसार कार्य करना चाहिए।
पात्र हैं।
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विद्वानों से करेंगे विचार विमर्श: कैलाशानंद

दक्षिण काली पीठाधीश्वर स्वामी कैलाशानंद ब्रह्मचारी ने कहा कि परंपराओं का निर्वहन उनके लिये जरुरी है। यदि परंपरा तोड़ी गयी और तो कैसा भी अनिष्ट हो सकता है।

मां के प्रकोप से मानवता को बचाने का दायित्व अधिष्ठाता होने के कारण इस समय मुझ पर है। सैकड़ों वर्षों से चली आ रही परंपराओं को तोड़ने का कोई फैसला मैं अकेले नहीं कर सकता। जहां तक ब्रह्मचारियों के अग्नि अखाड़े का सवाल है, बापू गोपालानंद महाराज ने अभी तक उन्हें कोई निर्देश नहीं दिया। विद्वान पंडितों के साथ बैठकर विचार विमर्श किया जायेगा और धर्मशास्त्रों के अनुसार समीक्षा की जायेगी।

दक्षिण काली मंदिर में पशुओं की बलि दी गई है। हम इसके खिलाफ हाईकोर्ट का दरवाजा खटखटाएंगे। इससे पहले हम दक्षिण काली मंदिर के पीठाधीश्वर, प्रदेश के मुख्य सचिव और वन विभाग को कानूनी नोटिस भेज रहे हैं। पीठाधीश्वर और मुख्य सचिव ने हाईकोर्ट के आदेशों का पालन नहीं कराया। जबकि वन विभाग से भूमि की लीज समाप्त करने का अनुरोध किया जाएगा।
- गौरी मौलेखी, सदस्य सचिव पीएफए उत्तराखंड।

मंदिर परिसर में किसी को धमकाने जैसी कोई घटना नहीं हुई। कानून व्यवस्था की दृष्टि से वहां पर पुलिस तैनात की गई थी। धमकाने जैसी बात निराधार है।
- डा. सदानंद दाते, एसएसपी हरिद्वार।

प्रशासन के प्रतिनिधि के तौर पर मैं पूरा समय वहां पर मौजूद रहा। रात को मंदिर परिसर के द्वार बंद कर लिए गए थे। किसी की पूजा में व्यवधान डालने का हक किसी को नहीं है। हमने यह सुनिश्चित किया कि यहां पर कोई गैरकानूनी काम नहीं हो।
- वीर सिंह बुद्धियाल, एसडीएम हरिद्वार।
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