पशुबलि के लिए विख्यात उत्तराखंड में पौड़ी के बूंखाल मेले में इस बार भी खून नहीं बहा। मेले में श्रद्धालुओं ने नारियल चढ़ाकर देवी की पूजा की।
बलि कुंड के समीप हुआ हवन
जिलाधिकारी चंद्रशेखर भट्ट ने मेले में पशु बलि नहीं होने की पुष्टि करते हुए बताया कि बूंखाल मेले में 2011 से पशुबलि बंद हो गई है। शनिवार को हुए इस मेले में सुबह से ही श्रद्धालु आने लगे थे। सुबह मंदिर में बने बलि कुंड के समीप हवन किया गया।
उसके बाद कुंड में पूजा के साथ नारियल चढ़ाने की प्रक्रिया शुरू हुई। सैंजी, बुरांशी धारकोट, क्वी, मलुंड, नलई समेत कई गांवों से देवी देवताओं की डोली को ढोल दमांऊ के साथ मंदिर तक लाया गया।
डोलियों के आगमन के दौरान जयकारों और ढोल दमांऊ की थाप पर श्रद्धालु झूमते रहे। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए एडीएम, तहसीलदार, सीओ आदि मेला संपन्न होने तक मौके पर रहे।
पोखरी गांव में भी रोकी पशुबलि
गौचर (चमोली) के श्रीकोट के अंतर्गत पोखरी गांव स्थित हरियाली देवी मंदिर में शनिवार को होने वाली पशु बलि प्रशासन की चौकसी के चलते रोक दी गई।
प्रशासन की टीम ने बलि के लिए लाए गए नर भैंसे को अपने कब्जे में ले लिया। प्रशासन ने ग्रामीणों से वार्ता कर यह पशु बलि रुकवाई।