देहरादून। तीनों ऊर्जा निगमों में अभी तक समान कार्य-समान वेतन न मिलने पर उपनल कर्मचारियों में रोष है। उत्तराखंड विद्युत संविदा कर्मचारी संगठन (इंटक) ने बैठक कर मामले पर चर्चा की और स्पष्ट किया कि जल्द लागू न किया गया तो वे कठोर कदम उठाने को बाध्य होंगे।
बैठक में संगठन के देहरादून, उत्तरकाशी, चमोली, पौड़ी, रुद्रप्रयाग, टिहरी, हरिद्वार, पिथौरागढ़, अल्मोड़ा, नैनीताल, बागेश्वर, चंपावत, ऊधमसिंह नगर के सदस्यों ने वर्चुअल माध्यम से हिस्सा लिया। संगठन के महामंत्री मनोज पंत ने कहा कि शासन के फरवरी में जारी शासनादेश को चार माह बीत जाने के बाद भी ऊर्जा निगमों में समान वेतन के आदेश लागू नहीं हुए हैं, जो अत्यंत दुर्भाग्यपूर्ण है। इससे ऊर्जा क्षेत्र में कार्यरत संविदा कर्मचारियों में गहरा असंतोष है। प्रदेश उपाध्यक्ष लाल सिंह गुसाईं ने कहा कि राज्य के कई विभागों में समान वेतन के आदेश लागू हो चुके हैं लेकिन ऊर्जा के किसी भी निगम ने अब तक आदेश जारी नहीं किए गए।
प्रदेश अध्यक्ष विनोद कवि ने कहा कि हाईकोर्ट, सुप्रीम कोर्ट के निर्णय बाद कैबिनेट के निर्णय पर शासन से जारी आदेशों की अवमानना अधिकारियों की हठधर्मिता को उजागर करता है। एक तरफ सरकार की ओर से उच्च न्यायालय में अंतिम अवसर दिए जाने मांग की गई तो दूसरी ओर शासन ने अब तक समस्त विभागों, निगमों के लिए अंतिम अवसर के रूप में न तो कोई आदेश जारी किए और न ही विभागों ने न्यायालय के आदेशों का अनुपालन किया। स्पष्ट होता है कि जानबूझकर उच्च न्यायालय के निर्देशों की अवमानना की जा रही है। संगठन ने तीनों निगम प्रबंधनों से मुलाकात कर समान वेतन के आदेश लागू करने का अनुरोध किया लेकिन आश्वासनों के सिवाय कुछ न मिला। बैठक में निर्णय लिया गया है कि शीघ्र ही प्रमुख सचिव ऊर्जा से मुलाकात की जाए। इसके बाद भी यदि तीनों निगमों में समान वेतन के आदेश लागू नहीं होते तो संगठन कठोर कदम उठाने को बाध्य होगा। इसकी पूरी जिम्मेदारी निगम प्रबंधनों व शासन की होगी। बैठक में प्रेम भट्ट, कैलाश उपाध्याय, कंचन जोशी, अंकित सैनी, नरेंद्र, रवि, सुनील, शीला बोरा, नीरज, हेमलता, संगीता, वंदना, पूजा, नीलांबर आदि शामिल हुए।