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उत्तराखंड: 59.8 प्रतिशत बच्चों और 46.5 प्रतिशत महिलाओं में खून की कमी

Thu, 30 May 2019 03:35 PM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal राजीव शुक्ला, अमर उजाला, हल्द्वानी
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प्रतीकात्मक
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राज्य की बदहाल स्वास्थ्य सेवाओं का एक और सच सामने आया है। राज्य में छह महीने से साढ़े चार वर्ष के 59.8 प्रतिशत बच्चे और 15 से 49 वर्ष की 46.5 प्रतिशत बालिकाओं/महिलाओं में खून की कमी है। उत्तरकाशी, हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर में बच्चे सबसे अधिक एनिमिक हैं जबकि हरिद्वार और उत्तरकाशी में गर्भवती महिलाओं में खून की कमी ज्यादा है। एनएचएम के तहत अभियान चलने के बाद भी ये नतीजे चौंकाने वाले हैं।

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छह महीने से साढ़े चार वर्ष की बच्चियों और 49 वर्ष तक की गर्भवती महिलाओं में खून की कमी दूर करने के लिए आयरन की गोलियां खिलाई जाती हैं। साथ ही स्कूलों में भी आयरन की गोलियां खिलाने को लेकर अभियान चलता है। बता दें कि बीच में आयरन की गोलियों के सैंपल फेल होने के बाद आपूर्ति रोक दी गई थी और छात्राओं को आयरन की गोलियां नहीं खिलाई गईं थीं। हालांकि, अब केंद्र स्तर से नए सिरे से आयरन की गोलियों की सप्लाई हो रही है। 

जिलों के आंकड़े (प्रतिशत में)
जिला   छह माह से साढ़े चार वर्ष के बच्चे   49 वर्ष तक की गर्भवती महिलाएं
अल्मोड़ा      48.6                         40.4  
बागेश्वर       49.0                       47.1
चमोली        53.6                       44.5
चंपावत       46.1                         33.5
देहरादून       50.6                         33.4
हरिद्वार        71.1                         61.7 
नैनीताल      58.0                        41.5
पौड़ी         58.1                          00 
पिथौरागढ़    42.3                          42.0
रुद्रप्रयाग     58.6                         56.5
टिहरी        59.9                          34.5
यूएस नगर 64.6                      53.0 
उत्तरकाशी      76.2                    60.2

फास्ट फूड बना रहा है बीमार
महिला अस्पताल की सीएमएस डॉ. भागीरथी जोशी के अनुसार फास्ट फूड का चलन तेजी के साथ बढ़ रहा है। फास्ट फूड का बढ़ता कल्चर भी हीमोग्लोबिन कम होने का मुख्य कारण है। स्वस्थ जीवन और निरोगी काया के लिए अपने देशी और पारंपरिक खानपान की ओर लोगों को लौटना होगा। 
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भोजन की थाली से गायब हो गया मडुवा, गुड़, चना और हरी सब्जियां
वरिष्ठ स्त्री एवं प्रसूति रोग विशेषज्ञ डॉ. प्रेक्षा पांडे के अनुसार हरी साग सब्जियां, मडुवा, गुड़ और चने जैसे भोजन को छोड़कर फास्ट फूड की अधिकता भी एक बड़ा कारण है। गर्भवती महिला में एनीमिया है तो खतरा अधिक रहता है और जान जाने की संभावना अधिक है। मां अगर एनमिक है तो बच्चा भी आगे चलकर एनमिक हो सकता है। हहै। बक हो सकता है। बच्चा भी आगे चलकर एनमिक हो सकता है। 

आयरन की दवा के सैंपल फेल होने के कारण बीच में आपूर्ति बाधित हो गई थी। दोबारा आयरन की सप्लाई आने के बाद जिलों के माध्यम से वितरित की जा रही है। प्रयास किया जाएगा कि बच्चों और गर्भवती महिलाओं खून की कमी को दूर किया जा सका।
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-डॉ. अंजलि नौटियाल, निदेशक, एनएचएम

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