प्रदेश में पिछड़ रहे उत्तराखंड को-ऑपरेटिव डेरी फेडरेशन (यूसीडीएफ) के आंचल ब्रांड के दुग्ध उत्पादों की गुणवत्ता सुधारने की कवायद की जा रही है। आंचल की पहचान को दोबारा बाजार में लाने के लिए यूसीडीएफ ने कृषि मंत्रालय भारत सरकार को कोल्ड चेन बनाने और समितियों में डीपीएमसीयू यूनिट लगाने के लिए 20.60 करोड़ का प्रस्ताव भेजा है।
यह योजना वित्तीय वर्ष 2017-18 और 2018-19 के लिए है। योजना के तहत दूध बेचने वाले डीलर्स को 50 प्रतिशत सब्सिडी में रेफरिजेरेटर और डीप फ्रिज देने की योजना है। यूसीडीएफ 11 जिलों में 1134 समितियों के माध्यम से दूध उत्पादकों से दूध खरीदता है। और इसे पूरे प्रदेश में आंचल ब्रांड के नाम से बेचता है। तीन साल पूर्व तक आंचल ब्रांड बाजार में अपनी गुणवत्ता के लिए जाना जाता था लेकिन प्राइवेट कंपनियों के बाजार क्षेत्र में आने से आंचल ब्रांड की बिक्री में गिरावट आई है।
गुणवत्ता सुधारने को ये होगा काम
- समितियों से दूध लाने के लिए रेफरिजेरेटर केन
- बाजार में दूध उत्पाद पहुंचाने के लिए 11 वातानुकूलित वैन
- बाजार में दूध ले जाने के लिए इंसुलेटेड 16 वैन
ये होगा फायदा
दूध की क्वालिटी सुधरेगी
दूध और दुग्ध उत्पादों की बिक्री बढ़ेगी
दुग्ध संघों को होगा फायदा। उत्पादकों को भी मिलेगा लाभ
11 जिलों में लगेंगे डीपीएमसीयू यूनिट
यूसीडीएफ दुग्ध उत्पादकों को सीधे लाभ देने के लिए 11 जिलों की 1134 दुग्ध समितियों में डाटा प्रोसेसर एंड मिल्क कलेक्शन यूनिट (डीपीएमसीयू) लगाने जा रहा है। इसके लगते ही दुग्ध उत्पादकों को सीधे लाभ होगा। इस यूनिट के लगने से दूध के तौल से लेकर फैट ऑटोमेटिक निगलेगा। साथ ही दूध की पूरी कीमत की प्रिंटेड पर्ची दुग्ध उत्पादक को मिल जाएगी।
कृषि मंत्रालय भारत सरकार को दूध की गुणवत्ता सुधारने और दुग्ध उत्पादकों को सीधा फायदा पहुंचाने के लिए 20.60 करोड़ की विस्तृत प्रोजेक्ट रिपोर्ट सौंपी गई है। जल्द ही इसमें पैसा मिलने की उम्मीद है।
- दीप बिष्ट, सामान्य प्रबंधक यूसीडीएफ