हरिद्वार से शंखनाद के ये तीन अहम कारण
2022 की कसक : पिछले विधानसभा चुनाव में हरिद्वार जिले की 11 सीटों में से भाजपा मात्र तीन सीटें (हरिद्वार, भेल रानीपुर, रुड़की) ही भाजपा के खाते में आई थीं। बाकी सीटें कांग्रेस, बसपा और निर्दलीय के खाते में गई थीं। शाह का यह दौरा कार्यकर्ताओं में नई ऊर्जा भरके इस गढ़ को वापस पाने की कवायद है।
हिंदुत्व का केंद्र : हरिद्वार से निकलने वाला संदेश पूरे राज्य और देश की धार्मिक-सांस्कृतिक चेतना को प्रभावित करता है।
मैदानी समीकरण : उत्तराखंड की सत्ता की राह हरिद्वार और ऊधमसिंह नगर जैसे मैदानी जिलों से होकर गुजरती है। इन जिलों में कांग्रेस व अन्य विपक्षी दलों को लगातार अच्छी सीटें मिलती रही हैं। लिहाजा, यहां पकड़ मजबूत करना भाजपा की प्राथमिकता है।
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जनसभा के बाद बनेगी मिशन 2027 की रणनीति
गृह मंत्री शाह की जनसभा के बाद एक निजी होटल में भाजपा की टोली बैठक होगी। पार्टी के अध्यक्ष महेंद्र भट्ट ने बताया कि टोली बैठक में कोर ग्रुप के 14 सदस्य मुख्यमंत्री पुष्कर सिंह धामी, प्रदेश अध्यक्ष व राज्यसभा सांसद महेंद्र भट्ट, महामंत्री संगठन अजय कुमार, निवर्तमान प्रदेश अध्यक्ष मदन कौशिक, पांच लोकसभा, दो राज्यसभा सांसद, कैबिनेट मंत्री सतपाल महाराज, धन सिंह रावत के अलावा नौ अन्य प्रदेश महामंत्री दीप्ति रावत, कुंदन परिहार, तरुण बंसल, पूर्व सीएम विजय बहुगुणा, तीरथ सिंह रावत, कैबिनेट मंत्री सुबोध उनियाल, रेखा आर्य, गणेश जोशी, सौरभ बहुगुणा शामिल होंगे। माना जा रहा है कि शाह तीसरी लगातार जीत को पुख्ता करने के सूत्र बताएंगे।