विषम भौगोलिक परिस्थितियों वाले कालीमठ घाटी के जनप्रतिनिधियों का संघर्ष का रंग लाया है। यहां की 10 ग्राम पंचायतों के 13 गांवों में दोनों आयु वर्ग में 90 से 95 फीसदी कोरोना वैक्सीनेशन हो चुका है। एक माह पहले तक यहां के ग्रामीण टीका लगवाने के लिए 3 से 6 किमी पैदल और फिर 15 से 25 किमी वाहन से सफर कर ऊखीमठ व गुप्तकाशी की दौड़ भी लगा चुके हैं।
जिला पंचायत सदस्य विनोद राणा समेत क्षेत्रीय ग्राम प्रधानों ने गांवों का भ्रमण कर प्रत्येक परिवार को वैक्सीनेशन के लिए प्रेरित किया। साथ ही स्वास्थ्य विभाग के आला अधिकारियों से निरंतर पत्राचार कर क्षेत्र में वैक्सीनेशन सेंटर के संचालन की मांग भी की। उनके प्रयास रंग लगाए। 10 जून से अब तक घाटी के कालीमठ, कोटमा, जाल मल्ला, चौमासी व कुणजेठी गांव में टीकाकरण शिविर लगाए जा चुके हैं।
यही कारण है कि चौमासी, चिलौंड, कोटमा, कालीमठ में 45 वर्ष से अधिक उम्र के लोगों का कोरोना वैक्सीनेशन लगभग पूरा हो चुका है। वहीं, 18 से 44 वर्ष में भी घाटी के सबसे दूरस्थ चिलौंड गांव में 99 लोगों में से 84 को टीका लग चुका है। गांव में 3 गर्भवती, 3 धात्री और एक दिव्यांग है। शेष 8 लोगों को अगले दो दिन में टीका लगा दिया जाएगा।
ग्राम प्रधान गजपाल राणा, आशा देवी, त्रिलोक सिंह, मुलायम सिंह तिंदोरी, दिलवर रावत, अरविंद राणा, राकेश रावत, सरिता देवी, सुदर्शन राणा का कहना है कि आंगनबाड़ी व आशा कार्यकर्ताओं के साथ ही क्षेत्र के सामाजिक कार्यकर्ताओं के सहयोग से ग्रामीणों को टीकाकरण के लिए प्रेरित किया गया। जुलाई पहले सप्ताह तक संपूर्ण कालीमठ घाटी में शत-प्रतिशत टीकाकरण हो जाएगा।
स्लॉट बुकिंग सिस्टम के खत्म होने के बाद कालीमठ घाटी में टीकाकरण अभियान में तेजी आई है। अब, ग्रामीण अपना आधार व पेन कार्ड लेकर वैक्सीनेशन सेंटर में पहुंचकर आसानी से टीका लगवा रहे हैं। सामाजिक कार्यकर्ता ओम प्रकाश भट्ट, संदीप भट्ट व विपिन भट्ट ने बताया कि ग्रामीण टीकाकरण के लिए दो से तीन किमी पैदल चलकर सेंटरों पर जा रहे हैं।
टीकाकरण अभियान में कालीमठ घाटी के ग्रामीणों का उत्साह देखते ही बन रहा है। यहां चरणबद्ध वैक्सीनेशन शिविर लगाए जा रहे हैं। उम्मीद है कि अगले दस दिन में इस पूरे क्षेत्र में दोनों आयुवर्ग में शत-प्रतिशत टीकाकरण हो जाएगा।
- डा. गोपाल सिंह सजवाण, प्रभारी, पीएचसी ऊखीमठ