वर्ष ऋषिकेश हरिद्वार हल्द्वानी काशीपुर रुद्रपुर
2016 118 128 130 121 142
2017 129 101 125 115 124
2018 129 123 126 106 119
2019 136 131 111 126 129
2020 108 99 108 117 115
बीते पांच वर्षों में देहरादून के पीएम-10 की स्थिति
वर्ष घंटाघर रायपुर आईएसबीटी
2016 180 245 288
2017 190 224 302
2018 176 161 265
2019 171 124 205
2020 137 80 144
बीते दो वर्षों में देहरादून के तीन स्थानों पर पीएम-2.5 की स्थिति
वर्ष घंटाघर रायपुर आईएसबीटी
2019 94 73 107
2020 84 68 84
वेबसाइट पर उपलब्ध आंकड़ों में कहीं कोई झोल नहीं है। पीएम-10 और पीएम 2.5 की स्थिति यदि सुधरी है तो इसके कई कारण हो सकते हैं। पहले की अपेक्षा अब वाहन कम धुंआ उगलते हैं, उनकी तकनीक में काफी हद तक सुधार हुआ है। सड़कें भी पहले से बेहतर हो गई हैं। वाहनों के धुएं के अलावा धूल के कण भी वायु प्रदूषण का एक बड़ा कारक बनते हैं। इसके अलावा औद्योगिक क्षेत्र में भी पहले के मुकाबले नियमों का सख्ती से पालन कराया जा रहा है।
- एसएस सुबुद्धि, सदस्य सचिव, उत्तराखंड पर्यावरण संरक्षण एवं प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड
जब पूरे देश में वायु प्रदूषण की मात्रा लगातार बढ़ रही है, तब उत्तराखंड में वायु प्रदूषण का लगातार कम होना आश्चर्यचकित करता है। यहां भी देश के अन्य प्रदेशों की तरह कूड़ा, वाहन, उद्योग और वायु प्रदूषण को बढ़ाने वाले अन्य कारकों में तेजी से इजाफा हुआ है। इस लिहाज से जो आंकड़े प्रस्तुत किए गए हैं और वायु प्रदूषण के मापने की प्रक्रिया पर उत्तराखंड सरकार को किसी नामित राष्ट्रीय एजेंसी से सलाह लेनी चाहिए।
- अनूप नौटियाल, अध्यक्ष, सोशल डेवलपमेंट फॉर कम्युनिटीस फाउंडेशन