दिन-दोपहरी में कश्मीरी पंडितों को मौत के घाट उतार दिया जाता था। सब कुछ खुलेआम होता था, लेकिन कोई उनके बचाव में नहीं आता था। उन्होंने कहा कि इस साजिश से कश्मीरी पंडित पूरी तरह अंजान थे। 1989-90 में पाकिस्तान की साजिश से पर्दा उठा, जब कश्मीरी पंडितों के घर उजाड़ दिए गए। कहा कि उनके साथ अन्याय होता रहा, लेकिन राज्य सरकार मूक दर्शक बनी रही। इससे बड़ा अन्याय और क्या हो सकता है?
कश्मीरी पंडितों ने कहा कि इस साजिश को अंजाम देने में अमेरिका की भी अहम भूमिका रही। 1971 के युद्ध में पाकिस्तान की मदद व तालिबान को बढ़ावा देने के लिए अमेरिका ने बड़ी मात्रा में हथियार मुहैया कराए। पाकिस्तान ने इन्हीं हथियारों का इस्तेमाल भारत के खिलाफ किया। कहा कि उन दिनों हथियारों की कोई कमी नहीं थी। हथियारों के बल पर कश्मीरी पंडितों के घर उजाड़ दिए।
अपने घर की याद किसे नहीं आती। आज भी उनके जहन में बचपन में कश्मीर में बिताए पलों की यादें ताजा हैं। वो कश्मीर में अपने घर लौटने को बेताब तो हैं, लेकिन मौजूदा हालातों में यह मुमकिन नहीं। अगर केंद्र सरकार उन्हें रोजगार और सुरक्षा की गारंटी दे तो वे घर वापसी को तैयार हैं।
कश्मीर पंडितों ने कहा कि वे जल्दबाजी में घर वापसी नहीं करना चाहते हैं। वो आज भी उस दर्दनाक मंजर को भुला नहीं पाए हैं। उस समय वो साजिश से अंजान थे, उन्हें इस मंजर का अंदाजा नहीं था, लेकिन आज उन्होंने कई सबक सीखे हैं। उन्होंने मांग की है कि सरकार को कश्मीरी पंडितों की घर वापसी के लिए अहम कदम उठाने चाहिए।