राजधानी से ही दूसरे शहरों के लिए डग्गामार बसें धड़ल्ले से चल रही हैं। खासकर आईएसबीटी के आसपास के क्षेत्रों से इन बसों का संचालन किया जा रहा है। शुक्रवार को अमर उजाला संवाद में डग्गामारी का यह मुद्दा प्रमुखता से उठा।
पूर्व राज्यमंत्री एवं भाजपा नेता रविंद्र जुगरान ने कहा कि डग्गामारी तेजी से बढ़ रही है। बड़ी-बड़ी डीलक्स बसें सड़कों पर खड़ी रहती हैं। यात्री इनमें एसी जैसी सुविधाओं के लालच में आकर यात्रा तो करते हैं लेकिन यह बेहद खतरनाक भी हो सकता है। रविंद्र जुगरान ने आरोप लगाया कि डग्गामारी की यह परंपरा, विभाग के अधिकारियों की मिलीभगत से ही चल रही है।
इन डग्गामार बसों का कहीं कोई हादसा हो गया तो उस पर यात्रियों को सरकार से कोई लाभ या सुविधा भी नहीं मिल पाएगी। परिवहन निगम महाप्रबंधक दीपक जैन ने भी स्वीकार किया कि आईएसबीटी समेत राजधानी के विभिन्न इलाकों से डग्गामार वातानुकूलित बसों का संचालन हो रहा है, जिसके चलते निगम को भारी नुकसान हो रहा है।
...सवारियों को लेकर गली में घुस गए डग्गामार
अमर उजाला संवाद में पहुंचे रोडवेज कर्मचारी संयुक्त परिषद के प्रदेश महामंत्री दिनेश पंत ने डग्गामारों की सेटिंग की पोल भी खोली। उन्होंने बताया कि सहस्रधारा क्षेत्र में चार वातानुकूलित बसों का संचालन किया जा रहा है। जिसे पकड़ने के लिए विभागीय टीम ने जाल बिछाया। मामले की जानकारी परिवहन विभाग के अधिकारियोें को भी दी गई। लेकिन विभाग से ही किसी ने यह सूचना डग्गामार बस संचालकों को लीक कर दी। चालक सवारियों से भरी बस लेकर फरार हो गए। दिलचस्प पहलू यह है कि जिस बस को साढ़े नौ बजे रवाना होना था, वह डेढ़ बजे तक एक जगह खड़ी रही और यात्री एसी में यूं ही खड़ी बस में सोते रहे।
धड़ल्ले से हो रही ऑनलाइन बुकिंग
संवाद में इस बात का भी खुलासा हुआ कि कई आपरेटर्स यात्रियों की ऑनलाइन बुकिंग कर रहे हैं। इसकी कोई जानकारी परिवहन विभाग व निगम अधिकारियों को नहीं है। चौंकाने वाली बात यह है कि निजी आपरेटर्स द्वारा विभागीय अधिकारियों, कर्मचारियों से मिलीभगत करके आईएसबीटी से नई दिल्ली, गुरुग्राम, जयपुर, चंडीगढ़, शिमला समेत तमाम स्थानों के लिए वातानुकूलित बसों का अवैध संचालन किया जा रहा है।
क्या कहता है एमवी एक्ट
मोटर व्हीकल एक्ट के मुताबिक, राष्ट्रीय राजमार्गों पर बसों के संचालन का पहला हक राज्य के परिवहन निगम की बसों को है। उसके बाद परिवहन विभाग की अनुमति व संबंधित परिवहन निगम के अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करने के बाद निजी बसों के संचालन को अनुमति दी जा सकती है। लेकिन निगम से अनापत्ति के लिए बस संचालकों को एकमुश्त भुगतान करना होगा।
बस अड्डे से बाहर बसें दिखें तो सावधान रहें
अगर आईएसबीटी से बाहर कोई चमकती हुई डीलक्स बस दिखे तो सावधान रहें। यह डग्गामार हो सकती है। बस को लेकर जरा भी संशय है तो आईएसबीटी स्थित इन्क्वायरी काउंटर पर जाएं। यहां पूछताछ करने के बाद ही बस में यात्रा करें।
आईएसबीटी समेत राजधानी के विभिन्न इलाकों में वातानुकूलित बसों समेत गाड़ियों की डग्गामारी की जानकारी नहीं है। यदि ऐसा है तो यह गंभीर मामला है। इस संबंध में जल्द ही विभागीय टीम गठित कर कार्रवाई की जाएगी। डग्गामार गाड़ियोें के संचालन पर पूरी तरह रोक लगाई जाएगी।
- डीसी पठोई, आरटीओ