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Amar Ujala Samvad 2023: युवा प्रतिभा और सामाजिक कार्यों में उल्लेखनीय भूमिका निभाने वालों का होगा सम्मान

Fri, 16 Jun 2023 12:48 PM IST
रेनू सकलानी अमर उजाला, न्यूज डेस्क, देहरादून

सार

'अमर उजाला संवाद उत्तराखंड' के तहत जानी-मानी हस्तियां अपने विचार साझा करेंगी। कार्यक्रम 19 जून यानी सोमवार सुबह नौ बजे से देहरादून में होगा। इस दौरान विभिन्न क्षेत्रों में उल्लेखनीय काम करने वालों को अमर उजाला सम्मानित करेगा।
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अमर उजाला संवाद 2023 - फोटो : amar ujala
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विस्तार
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75वीं सालगिरह से स्वर्णिम शताब्दी की ओर बढ़ रहा अमर उजाला राजधानी में 'संवाद उत्तराखंड' का आयोजन करने जा रहा है। इस मौके पर अमर उजाला उत्तराखंड की उन युवा प्रतिभाओं, संस्कृतिकर्मियों और सामाजिक कार्यों में उल्लेखनीय भूमिाक निभाने वाली विभूतियों को भी सम्मानित करेगा, जो अपने नवाचार, पर्यावरण , कला संस्कृति के क्षेत्र में अपने सामाजिक सरोकारों का दायित्व निभाते हुए देवभूमि को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिला रहे हैं।

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19 जून को आयोजित होने वाले इस आयोजन में देश की नामी गिरामी हस्तियां राज्य में पर्यटन, शिक्षा, स्टार्टअप, खेल, फिल्म एवं संस्कृति के क्षेत्र में भविष्य की संभावनाओं पर मंथन करेंगी। कार्यक्रम सोमवार सुबह नौ बजे देहरादून के होटल सरोवर प्रीमियर में होगा। इस बार 'संवाद' में उत्तराखंड के विकास पर चर्चा होगी। देश की जानी-मानी शख्सियतें, नीति-नियंता, विचारक-विशेषज्ञ श्रोताओं से रू-ब-रू होंगे। 

इनका होगा सम्मान

राहुल रावत, कोटद्वार

राहुल रावत 'दिगंतरा कंपनी' के फाउंडर हैं, जो विश्व के 21 देशों को अंतरिक्ष में रास्ता दिखाने का काम करती है। राहुल को 2.5 मिलियन डालर का इन्वेस्टमेंट मिला है। अंतरिक्ष यानों को उड़ान के लिए सुरक्षित रास्तों की जरूरत होती है, उनकी कंपनी इसी रास्ते का मैप बनाने का काम करती है। जब भी कोई देश अंतरिक्ष में बड़ा ऑपरेशन करता है या सेटेलाइन रवाना करता है तब सबसे बड़ी चुनौती होती है स्पेस का कचरा। राहुल की कंपनी इसी मुश्किल का हल बताती है, ताकि स्पेशशिप को कोई नुकसान न हो। इस नवाचार से देश भर के युवाओं की प्रेरणा बने कोटद्वार के राहुल रावत को सम्मानित करेगा।
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 हेमलता कबडवाल, मुक्तेश्वर
भारत के नए संसद भवन में कुमाऊं की ऐपण कला को स्थान दिया गया है। ऐपण कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रहीं मुक्तेश्वर की हेमलता कबडवाल ने भारत के विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों के साथ मिलकर संसद भवन के लिए वॉल पेंटिंग बनाई है। 80 फुट की यह पेंटिंग विश्व की अब तक की सबसे लंबी पेंटिंग में शामिल है। 28 मई को नए संसद भवन के लोकार्पण के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीपल वॉल पेंटिंग का भी अनावरण किया। अमर उजाला चयनकर्ताओं ने उत्तराखंड की संस्कृति और कला को नए संसद भवन तक पहुंचाने के लिए हेमलता के इस प्रयास को सरहानीय पाया। उत्तराखंड की संस्कृति की वाहक युवा हेमलता कबडवाल को आज अमर सम्मानित कर रहा है।

दिव्या नेगी, टिहरी
राष्ट्रीय युवा संसद में उत्तराखंड की प्रतिनिधि बनकर थौलधार प्रखंड के सुनार गांव निवासी दिव्या नेगी ने टिहरी जिले और उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। दिव्या ने जी-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाले भारत की भूमिका पर तीन मिनट की शानदार प्रस्तुति दी। दिव्या का जन्म और पालन-पोषण टिहरी जिले के थौलधर ब्लॉक के सोनार गांव में हुआ था। उसने आठवीं कक्षा तक अपनी प्राथमिक शिक्षा के लिए गाँव के स्कूल में पढ़ाई की। उन्होंने कांदीखाल टिहरी में ग्रीन हिल पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद देहरादून में अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की, और बाद में उन्होंने देहरादून के एसजीआरआर पीजी कॉलेज में अपनी डिग्री की। ऐसी हजारों लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं दिव्या नेगी को अमर उजाला सम्मानित कर रहा है।

 बबीता रावत, रुद्रप्रयाग
अगस्तयमुनि के गांव उमरौला सौड़ निवासी बबीता रावत ने गांव में रहकर कामयाबी की नई इबारत लिखी है। आर्थिक तंगी के बावजूद बबीता रावत ने हार नहीं मानी और संघर्षों के बूते मुकाम हासिल कर पहाड़ की अन्य महिलाओं के लिए भी प्रेरणा का स्रोत बन गईं। परिवार को आर्थिक तंगी से उबारने के लिए उन्होंने अपनी खाली पड़ी 17 नाली यानी करीब 37 हजार वर्ग फीट भूमि पर खुद हल चलाकर उसे उपजाऊ बनाया। साथ ही सब्जी उत्पादन, पशुपालन व मशरूम उत्पादन के जरिये सफलता की नई दास्तान लिख डाली। उनके इसी प्रेरणादायी संघर्ष के लिए प्रदेश सरकार की ओर से उन्हें इस वर्ष तीलू रौतेली पुरस्कार से नवाजा गया। ऐसी कर्मठ बबिता को अमर उजाला सम्मानित कर गौरव की अनुभूति कर रहा है।

 शिकायना मुखिया, देहरादून

महज 16 साल की शिकायना मुखिया अपने परिवार के साथ देहरादून के डालनवाला में रहती हैं। वे कर्नल ब्राउन कैंब्रिज ब्वायज स्कूल में पढ़ रही हैं। उनके पापा विकास मुखिया म्यूजिक टीचर हैं और अपना एक बैंड (माया बैंड) भी है। शिकायना मुखिया सोनी चैनल में प्रसारित हुए लिटिल वायस इंडिया में रनर अप रही थीं। अपनी गायिकी से शिकायना ने सभी के दिल में खास छाप छोड़ी थी। इसके बाद से उन्हें कई म्यूजिक एलबम से भी आफर मिले। इसके बाद उन्होंने सुपर स्टार सिंगर में भी अपनी आवाज का जादू बिखेरा। दून की शिकायना मुखिया ने शान के साथ बॉलीवुड फिल्म सुमेरू के 'वो तू है' गाने डेब्यू किया है। इसके साथ ही नार्थ इंडिया की एक बड़ी आर्टिस्ट मैनेजमेंट कंपनी ईवाईपी क्रिएशन ने भी शिकायना को साइन किया है। ऐसी प्रतिभाशाली सिंगर शिकायना को अमर उजाला सम्मानित कर रहा है।

 रजत जैन, देहरादून

देहरादून के रजत जैन ने एक ऐसी कमाल की पॉकेट साइज ईसीजी मशीन बनाई है, जिसे आसानी से घर पर इस्तेमाल कर जिंदगी बचाई जा सकती है। मेडिकल साइंस के क्षेत्र में यह अविष्कार देश-दुनिया में खूब सूर्खियां बटोर रहा है। इस मशीन से हम घर बैठे ग्लूकोमीटर से शुगर लेवल और पॉर्टेबल मशीन से बीपी तक माप सकते हैं। ईसीजी जांच की पॉकेट साइज मशीन ‘स्पंदन’ से घर पर ईसीजी जांच भी आसानी से की जा सकती है। रजत ने करीब चार साल की मेहनत के बाद जनवरी 2020 में उन्होंने ऐसा सेंसर विकसित किया, जिसे स्मार्ट फोन के साथ कनेक्ट कर ईसीजी जांच की जा सकती है। हाल ही में इन्होंने नेशनल टीवी पर प्रसारित शार्क टैंक इंडिया शो में हिस्सा लिया। लंदन में अति व्यस्तता के कारण वे इस समारोह में नहीं आ सके। उनकी जगह इस नवाचार में उनके सहयोगी अर्पित सेन यह पुरस्कार ग्रहण करेंगे।
 
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बॉबी कैश, देहरादून

बॉबी ने कंट्री म्यूज़िक को लेकर उन्होंने ऐसी छाप छोड़ी कि उन्हें "इंडियन काउबॉय" बुलाया जाने लगा। ऐसे दौर में जब हर किसी ने हिंदी सिनेमा की तरफ रुख किया, बॉलीवुड से हॉलीवुड तक से ऑफर होने के बावजूद पहाड़ों और देहरादून शहर से से उनका मोह खत्म नहीं हुआ। वह पहली बार गुलाबो सिताबो के बुढ़ाऊ गाने को अपनी आवाज दे रहे हैं। बॉबी कैश को लो प्रोफाइल रहना पसंद है। बॉबी कैश देहरादून से बहुत दूर एक छोटे से गांव में रहते हैं, जो कि नदियों और पहाड़ों से घिरा रहा है। उन्हें वहां सुकून मिलता है. वह अपने सारे गाने यहीं बैठ कर कम्पोज करते हैं। म्यूजिक में वह किसी ऋषि मुनि की तरह ही लीन रहते हैं। उनका जन्म का नाम बाल किशोर दास लोईवाल है। वह गिटारवादक, गायक, गीतकार, संगीतकार हैं। अमर उजाला उन्हें संस्कृतिकर्मी अवार्ड से सम्मानित करता है।

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80 साल की प्रभा देवी सेमवाल


प्रभा देवी सेमवाल की उम्र 80 साल हो चली है। इन्होंने अपने दम पर बंजर पहाड़ को घना जंगल बना दिया। रुद्रप्रयाग के एक छोटे से गांव में रहने वाली प्रभा देवी पेड़ों से इंसानों के रिश्ते को बखूबी समझती हैं। इस बुजुर्ग महिला ने अपने दम पर एक बंजर भूमि को हरे-भरे जंगल में तब्दील कर दिया है। प्रभा देवी जंगल के हर पेड़ को अच्छी तरह पहचानती हैं। वह 50 साल से जंगलों को सहेजने में जुटी है। दशकों की मेहनत के बाद आज उनके पास अपना खुद का जंगल है, जिसे इन्होंने खुद उगाया, पाला-पोसा और सहेजा है। जंगल में पांच सौ से ज्यादा पेड़ हैं। प्रभा देवी सेमवाल को अमर उजाला सामाजिक कृतज्ञता अवार्ड के लिए चुना गया है। आवार्ड की खबर सुनकर प्रभा देवी जी प्रसन्न हो गईं। लेकिन उन्होंने देहरादून आकर यह अवार्ड लेने में असमर्थता जताई महज इसलिए कि फिर यहां गांव में उनकी इकलौौती गाय को कौन देखेगा। उनसे भरोसा दिलाया गया कि एक रात अमर उजाला उनकी गाय का ख्याल कर लेगा। इस शर्त पर वे आज यहां अवार्ड लेने आई हैं। अमर उजाला उन्हें "सामाजिक कृतज्ञता" श्रेणी के अवार्ड से सम्मानित करेगा।
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