हेमलता कबडवाल, मुक्तेश्वर
भारत के नए संसद भवन में कुमाऊं की ऐपण कला को स्थान दिया गया है। ऐपण कला के संरक्षण और संवर्धन के लिए कार्य कर रहीं मुक्तेश्वर की हेमलता कबडवाल ने भारत के विभिन्न प्रदेशों के कलाकारों के साथ मिलकर संसद भवन के लिए वॉल पेंटिंग बनाई है। 80 फुट की यह पेंटिंग विश्व की अब तक की सबसे लंबी पेंटिंग में शामिल है। 28 मई को नए संसद भवन के लोकार्पण के अवसर पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने पीपल वॉल पेंटिंग का भी अनावरण किया। अमर उजाला चयनकर्ताओं ने उत्तराखंड की संस्कृति और कला को नए संसद भवन तक पहुंचाने के लिए हेमलता के इस प्रयास को सरहानीय पाया। उत्तराखंड की संस्कृति की वाहक युवा हेमलता कबडवाल को आज अमर सम्मानित कर रहा है।
दिव्या नेगी, टिहरी
राष्ट्रीय युवा संसद में उत्तराखंड की प्रतिनिधि बनकर थौलधार प्रखंड के सुनार गांव निवासी दिव्या नेगी ने टिहरी जिले और उत्तराखंड का मान बढ़ाया है। दिव्या ने जी-20 शिखर सम्मेलन की अध्यक्षता करने वाले भारत की भूमिका पर तीन मिनट की शानदार प्रस्तुति दी। दिव्या का जन्म और पालन-पोषण टिहरी जिले के थौलधर ब्लॉक के सोनार गांव में हुआ था। उसने आठवीं कक्षा तक अपनी प्राथमिक शिक्षा के लिए गाँव के स्कूल में पढ़ाई की। उन्होंने कांदीखाल टिहरी में ग्रीन हिल पब्लिक स्कूल में आठवीं कक्षा के पाठ्यक्रम को पूरा करने के बाद देहरादून में अपनी इंटरमीडिएट की पढ़ाई पूरी की, और बाद में उन्होंने देहरादून के एसजीआरआर पीजी कॉलेज में अपनी डिग्री की। ऐसी हजारों लाखों बेटियों के लिए प्रेरणा बनीं दिव्या नेगी को अमर उजाला सम्मानित कर रहा है।
बॉबी कैश, देहरादून
बॉबी ने कंट्री म्यूज़िक को लेकर उन्होंने ऐसी छाप छोड़ी कि उन्हें "इंडियन काउबॉय" बुलाया जाने लगा। ऐसे दौर में जब हर किसी ने हिंदी सिनेमा की तरफ रुख किया, बॉलीवुड से हॉलीवुड तक से ऑफर होने के बावजूद पहाड़ों और देहरादून शहर से से उनका मोह खत्म नहीं हुआ। वह पहली बार गुलाबो सिताबो के बुढ़ाऊ गाने को अपनी आवाज दे रहे हैं। बॉबी कैश को लो प्रोफाइल रहना पसंद है। बॉबी कैश देहरादून से बहुत दूर एक छोटे से गांव में रहते हैं, जो कि नदियों और पहाड़ों से घिरा रहा है। उन्हें वहां सुकून मिलता है. वह अपने सारे गाने यहीं बैठ कर कम्पोज करते हैं। म्यूजिक में वह किसी ऋषि मुनि की तरह ही लीन रहते हैं। उनका जन्म का नाम बाल किशोर दास लोईवाल है। वह गिटारवादक, गायक, गीतकार, संगीतकार हैं। अमर उजाला उन्हें संस्कृतिकर्मी अवार्ड से सम्मानित करता है।
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80 साल की प्रभा देवी सेमवाल
प्रभा देवी सेमवाल की उम्र 80 साल हो चली है। इन्होंने अपने दम पर बंजर पहाड़ को घना जंगल बना दिया। रुद्रप्रयाग के एक छोटे से गांव में रहने वाली प्रभा देवी पेड़ों से इंसानों के रिश्ते को बखूबी समझती हैं। इस बुजुर्ग महिला ने अपने दम पर एक बंजर भूमि को हरे-भरे जंगल में तब्दील कर दिया है। प्रभा देवी जंगल के हर पेड़ को अच्छी तरह पहचानती हैं। वह 50 साल से जंगलों को सहेजने में जुटी है। दशकों की मेहनत के बाद आज उनके पास अपना खुद का जंगल है, जिसे इन्होंने खुद उगाया, पाला-पोसा और सहेजा है। जंगल में पांच सौ से ज्यादा पेड़ हैं। प्रभा देवी सेमवाल को अमर उजाला सामाजिक कृतज्ञता अवार्ड के लिए चुना गया है। आवार्ड की खबर सुनकर प्रभा देवी जी प्रसन्न हो गईं। लेकिन उन्होंने देहरादून आकर यह अवार्ड लेने में असमर्थता जताई महज इसलिए कि फिर यहां गांव में उनकी इकलौौती गाय को कौन देखेगा। उनसे भरोसा दिलाया गया कि एक रात अमर उजाला उनकी गाय का ख्याल कर लेगा। इस शर्त पर वे आज यहां अवार्ड लेने आई हैं। अमर उजाला उन्हें "सामाजिक कृतज्ञता" श्रेणी के अवार्ड से सम्मानित करेगा।