रेरा के औचित्य पर उठाए सवाल
पुष्पांजलि की आर्किड पार्क और अन्य परियोजना में मेहनत की पूंजी लगाने के बाद भी फ्लैट नहीं मिलने के बाद साल 2018 से बायर्स की लड़ाई लड़ रही हूं। पुष्पांजलि का निदेशक दीपक मित्तल और उसकी पत्नी राखी मित्तल 2020 से फरार हैं। एक अन्य निदेशक राजपाल वालिया खुलेआम घूम रहा है। पुलिस में नौ मुकदमे दर्ज हैं और रेरा में 61 शिकायतें दर्ज कराई गई हैं। वर्ष 2018 से बिल्डर ने निर्माण बंद करा रखा है। इसके बाद भी सुनवाई नहीं हो रही है। जब रेरा में सुनवाई नहीं तो इसका औचित्य क्या है।
- कविता भाटिया
बिल्डरों ने उनकी जीवन भर की खून पसीने की कमाई को लूट लिया है। सभी लोग न्याय के लिए दर-दर की ठोकरें खा रहे हैं। कहने को रेरा को बायर्स के हितों की रक्षा के लिए बनाया है। लेकिन वहां भी सुनवाई नहीं हो रही है। वहां भी उन्हें कई बार बुलाया जाता है, लेकिन सुनवाई नहीं होती है। कहा जा रहा है कि कोर्ट की शरण लोग। पुलिस भी मामले में खानापूर्ति कर रही है। आखिर पीड़ित जाए तो जाए कहां। अब एकजुट होकर लड़ाई लड़ रहे हैं। लेकिन जिस प्रकार से रेरा की ओर से हाथ खड़े जा रहे हैं।
- ईरा
सालों से अपना हक पाने के लिए भटक रहे हैं। रेरा की ओर से न तो उचित कार्रवाई तो दूर बायर्स जहां जाते हैं तो उनसे अच्छा व्यवहार तक नहीं किया जाता है। उन्होंने अपनी मेहनत की कमाई से फ्लैट के लिए आवेदन किया था। लेकिन न तो उन्हें फ्लैट मिला है और न ही उनके पैसें वापस मिले हैं। रेरा को कई अधिकार मिले हैं, लेकिन वह अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर रहा है।
- मिथलेश
लाखों रुपये खर्च किए और छह साल से रेरा के चक्ककर काटते-काटते परेशान हो गए हैं। लेकिन आज तक उन्हें न्याय नहीं मिला है। रेरा की ओर से खाली उन्हें बार-बार बुलाया जाता है लेकिन आज तक न तो उन्हें फ्लैट दिलवाया गया और न ही उनके पैसे आज तक वापस हुए। आज भी वह रेरा के चक्कर काट रहे हैं। ऐसे में रेरा का क्या औचित्य रह गया, समझ से परे हैं।
- आलोका
रेरा में बिल्डर्स बिना बकालतनामा किए वकीलों को पेश कर रही है। लेकिन रेरा इसके बाद भी उनकी ही सुन रही है। बायर्स की बात सुनने को रेरा तैयार नहीं है। जबकि पीड़ित इस बात की शिकायत रेरा से कर चुके हैं। लेकिन रेरा की ओर से पीड़ितों की बजाए बिल्डरों की ज्यादा सुनवाई हो रही है। जिसके कारण आज सैकड़ों लोग धक्का खाने को मजबूर हो रहे हैं।
- शिखा
रेरा को असीमित अधिकार दिए गए हैं। लेकिन रेरा अपने अधिकारों का प्रयोग नहीं कर रहा है। इसलिए आज सैकड़ों शिकायतों के बाद भी बिल्डर लोगों की खून-पसीने की कमाई को लूट रहे हैं। जबकि बिल्डरों की मनमानी पर रोक लगाने को ही रेरा का गठन किया गया है। रेरा बायर की शिकातयों को भी गंभीरता से नहीं लेता है।
- टीएन जोहर
रेरा के पास असीमित अधिकार हैं। एक्ट भी सरल है। लेकिन इसके बाद भी पीड़ितों को समय से न्याय नहीं मिल पा रहा है। जो गंभीर विषय है। पीड़ितों को चाहिए कि रेरा में अगर सुनवाई नही हो रही है, तो वह अपीलेंट कोर्ट का दरवाजा खटखटाए। अगर उन्हें रिसीविंग और कार्रवाई की जानकारी नहीं दी जा रही है तो वह आरटीआई का सहारा लें और कोर्ट में इन दस्तावेजों को रखें।
-शिवा वर्मा अधिवक्ता