फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

हर किसी को जानना चाहिए इन नन्हें 'सितारों' का संघर्ष

Thu, 06 Aug 2015 01:06 PM IST
ब्यूरो / अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
विज्ञापन
अमर उजाला की ओर से देहरादून में आयोजित प्रतिभा सम्मान समारोह में प्रदेशभर के उत्तराखंड बोर्ड के मेधावी पहुंचे। इनका संघर्ष जान आप भी कह उठेंगे, क्या बात है...
विज्ञापन


प्रदेश के मुख्यमंत्री से सम्मान पाने का मौका उनके जीवन का यादगार लम्हा बन गया। मेधावियों में इससे आगे बढ़ने का उत्साह कई गुना बढ़ गया। इनमें कई मेधावी ऐसे भी थे, जो संघर्षों और अभावों के बीच से निकलकर आगे बढ़े हैं।

फैक्ट्री में काम करके पाए 90 प्रतिशत
लक्सर निवासी जीआईसी मुंडाखेड़ा से 90 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं करने वाले विशाल सिंह की कहानी तमाम बच्चों के लिए प्रेरणा से कम नहीं। विशाल की मां कुसुम सिंह एक फैक्ट्री में काम करके उसकी पढ़ाई का खर्च चलाती हैं।
विज्ञापन


कई महीने पढ़ाई का खर्च चलाने के लिए खुद विशाल ने भी एक फैक्ट्री में दिन में काम किया और रात को पढ़ाई की। बावजूद इसके विशाल का हौसला कम नहीं हुआ और उन्होंने उत्तराखंड बोर्ड परीक्षा में जिला हरिद्वार में तीसरा स्थान हासिल किया।

विशाल के पास वैसे तो बीएससी करने के लिए 80 हजार रुपए वार्षिक इंस्पायर स्कॉलरशिप का मौका है, लेकिन उन्होंने आईआईटी में जाने का लक्ष्य तय किया है। आजकल वह आईआईटी की तैयारी करने में जुटे हैं। सीएम के हाथों सम्मान होने पर विशाल बेहद खुश नजर आए। उन्होंने कहा कि इससे उन्हें और आगे बढ़ने की प्रेरणा मिली है।

सबसे मुश्किल राह में जाने का लक्ष्य
रुड़की के एसएसडीपीसी गर्ल्स इंटर कॉलेज से इसी साल 95 प्रतिशत अंकों के साथ प्रदेश में दूसरे स्थान पर रहने वाली प्राची गुप्ता का उत्साह सम्मान समारोह के बाद और बढ़ गया। प्राची ने बताया कि वह आईआईटी की प्रवेश परीक्षा पास करके इंजीनियर बनना चाहती हैं।

इसके लिए उन्होंने तैयारी भी शुरू कर दी है। छात्राओं के लिहाज से मुश्किल मानी जाने वाली आईआईटी की प्रवेश परीक्षा और आगे की पढ़ाई के सवाल पर उन्होंने कहा कि यह मुश्किल है, इसीलिए वह यहां भविष्य बनाना चाहती हैं। प्राची के पिता रेलवे में कैटरिंग मैनेजर हैं।

दून में सम्मान, आईएमए से पासआउट होने का ख्वाब
हल्द्वानी के हरगोविंद सुयाल सरस्वती विद्या मंदिर से 10वीं में 93.2 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में दूसरे स्थान पर रहने वाले मनमोहन सिंह बिष्ट आर्मी आफिसर बनना चाहते हैं।

मनमोहन ने बताया कि उनके पिता ग्रामीण विकास बैंक में कार्यरत हैं। उनका एक भाई बीएससी कर रहा है, जबकि एक भाई का पॉलीटेक्निक डिप्लोमा पूरा हो चुका है और एक की पॉलीटेक्निक की पढ़ाई चल रही है।

विशाल का सपना है कि वह देहरादून स्थित आईएमए से पासआउट होकर सेना में अफसर बने। सीएम के हाथों सम्मानित होने के बाद विशाल काफी प्रसन्न नजर आए। उन्होंने कहा कि आज उनका हौसला और बढ़ गया।

इनकी सक्सेस स्टोरी भी है कमाल की

इंजीनियर बनना चाहता है कांस्टेबल का बेटा
पौड़ी निवासी प्रीतम गुसाईं ने 10वीं में 98.2 प्रतिशत अंक हासिल कर जिले में पहला स्थान पाया। प्रीतम ने बताया कि उनके पिता दिनेश सिंह गुसाईं श्रीनगर में पुलिस कांस्टेबल हैं। वह हमेशा उसे आगे बढ़ने के प्रति प्रेरित करते हैं।

उनका एक भाई बीएससी कर रहा है, जबकि दूसरा भाई एमएससी कर रहा है। एसवीएम श्रीनगर से 10वीं करने वाले प्रीतम का सपना जेईई एडवांस परीक्षा के जरिए आईआईटी तक पहुंचने का है। इसके लिए उन्होंने अभी से तैयारी शुरू कर दी है। सीएम से सम्मान मिलने के बाद वह और उत्साहित नजर आए।

डॉक्टर बनकर अपने प्रदेश की सेवा का सपना
पौड़ी निवासी प्रियंका सकलानी ने 12वीं 91.2 प्रतिशत अंकों के साथ जिले में तीसरा स्थान हासिल किया है। प्रियंका के पिता आरपी सकलानी एसवीएमआईसी श्रीकोट, रुद्रप्रयाग में शिक्षक हैं।

प्रियंका ने बताया कि उनका बचपन से ही डॉक्टर बनने का सपना रहा है। इस बार भी उन्होंने यूपीएमटी की परीक्षा दी थी, लेकिन रैंक अच्छी नहीं आई। इस बार फिर वह मेडिकल प्रवेश परीक्षा की तैयारी कर रही हैं। प्रियंका को जब सीएम हरीश रावत ने सम्मान दिया तो वह बेहद उत्साहित नजर आईं। उन्होंने कहा कि यह अनमोल पल थे।

आईएएस बनना चाहती है नीरजा
भारतीय शहीद सैनिक विद्यालय, नैनीताल से 91.2 प्रतिशत अंकों के साथ 12वीं में जिले में दूसरे स्थान पर रहने वाली नीरजा ने देश सेवा के लिए सिविल सेवा परीक्षा की राह चुनने का फैसला किया है।

नीरजा के पिता पशुपालन विभाग में चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी हैं। उन्होंने बताया कि वह फिलहाल कुमाऊं विवि से बीएससी के साथ ही सिविल सेवा परीक्षा की तैयारी कर रही हैं।

उनका बचपन से ही एक कामयाब आईएएस बनने का सपना है। सीएम से सम्मानित होने के सवाल पर नीरजा बेहद उत्साहित होकर बोलीं, यह क्षण उनके जीवन में सबसे यादगार पल हैं।
विज्ञापन

मुख्यमंत्री ने किया बचपन के दिनों को याद

समारोह में मंच पर आसीन अतिथियों का दिल भी बच्चा बन गया। मुख्यमंत्री हरीश रावत ने भी अपने बचपन के दिनों को याद किया। उन्होंने कहा कि उस दौरान संसाधनों का अभाव था, स्कूलों की स्थिति उतनी अच्छी नहीं थी, स्कूल की छतें टपकती थी, लेकिन अब ऐसा नहीं है, स्थिति सुधरी हैं।

उन्होंने बच्चों को मेडल तो दिए ही, जीवन में सफलता के मंत्र भी दिए। कहा, जब वे पहली बार संसद में चुनकर गए तो उन्हें अहसास हुआ कि ज्ञान का भंडार असीम है, ..और उन्हें तो कुछ भी नहीं आता है। बोले, इसके बाद उन्होंने नियमित लाइब्रेरी का रुख करना शुरू कर दिया।

...ताकि प्रदेश का नाम और ऊंचा करूं
मुख्यमंत्री के हाथों सम्मान पाकर काफी खुशी मिली। यह पहला मौका था, जब सीएम के हाथों सम्मानित हुआ हूं। यह कहना है हाईस्कूल में 94.6 फीसदी अंक लाने वाले विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कालेज पिथौरागढ़ के मनोज सिंह पंडा का। मनोज अपने पिता शेर सिंह के साथ समारोह में पहुंचे थे। मनोज ने कहा कि आगे भी प्रयास करेंगे कि अच्छे अंक लाकर अपने माता पिता और प्रदेश का नाम ऊंचा करें।

अब इंटर की बारी
हाईस्कूल में 93.4 फीसदी अंक लाने वाली विवेकानंद विद्या मंदिर इंटर कालेज धारचूला पिथौरागढ़ की आंचल जायसवाल अपने परिजनों के साथ समारोह में पहुंचीं। बेटी को सम्मानित होता देख मां विमला जायसवाल, छोटे भाई जतिन और बड़े भाई प्रवीन बेहद खुश थे। आंचल ने कहा कि हाईस्कूल के बाद वह इंटरमीडिएट में और अच्छे अंक लाने का प्रयास करेगी।

सीएम ने जाना बच्चों का हाल
समारोह में मुख्यमंत्री हरीश रावत ने बच्चों का हाल चाल जाना, उन्होंने काफी देर तक बच्चों से बातचीत कर उनके क्षेत्रों के बारे में जानकारी ली। सीएम ने बच्चों से और बेहतर करने को कहा, वही इस आयोजन के लिए अमर उजाला को बधाई दी।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें