फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

अंजाम तक पहुंची अमर उजाला की मुहिम, गुमनाम पत्र से शुरू हुई थी संवासिनी को न्याय दिलाने की लड़ाई

Tue, 03 Sep 2019 08:20 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
विज्ञापन
नारी निकेतन मामले में दोषियों को ले जाती पुलिस - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन

देहरादून के नारी निकेतन में मूक बधिर संवासिनी से दुष्कर्म, गर्भपात और भ्रूण को दबाने के माममे में न्याय दिलाने की राह बेहद कठिन थी। कदम-कदम पर साजिशों के जाल थे। पूरा सिस्टम विरोध में था, लेकिन अमर उजाला ने हार नहीं मानी। महज से गुमनाम पत्र से शुरू हुई यह लड़ाई सोमवार को आखिरकार अंजाम तक पहुंच गई। 

विज्ञापन


संवासिनी से दुष्कर्म और गर्भपात को लेकर ‘अमर उजाला’ के पास एक गोपनीय पत्र के अलावा कुछ नहीं था। यह भी नहीं पता था कि पत्र के तथ्यों में कितनी सच्चाई है। पत्र लगाए गए आरोप बेहद गंभीर थे, इसीलिए अमर उजाला टीम ने मामले की तह तक जाने का फैसला लिया। इसके बाद शुरू हुआ तफ्तीश का सिलसिला। अमर उजाला के अंडर कवर रिपोर्टर को नारी निकेतन भेजकर सच जानने की कोशिश की।

रिपोर्टर ने किसी तरह पीड़ित मूक बधिर से बातचीत की। वह इशारों में सवालों का जवाब दे रही थी। उसके हर इशारे की वीडियोग्राफी कराई गई। मूक बधिर एक्सपर्ट से इशारों को लेकर राय मशविरा किया गया तो दुष्कर्म और गर्भपात के आरोपों को दम मिल गया। अमर उजाला ने इस मामले का खुलासा किया तो साजिशों का सिलसिला और तेज हो गया। मामले को दबाने के लिए अगले ही दिन नारी निकेतन प्रशासन ने संवासनियों को भड़काकर मौके पर पहुंची अमर उजाला टीम पर पत्थरबाजी कर दी।
विज्ञापन


वहीं, तत्कालीन अपर जिलाधिकारी झरना कामठान जांच के लिए पहुंचीं तो पीड़ित संवासिनी के साथ उसी के नाम की दूसरी संवासिनी को प्रस्तुत किया गया। नतीजा यह हुआ कि साजिश के तहत अमर उजाला के प्रयासों पर सवाल उठने लगे। लेकिन, अमर उजाला ने दबाव को दरकिनार कर प्रयास जारी रखे। 

विज्ञापन

अंधेरे में तीर चालने जैसी थी स्थिति

आखिरकर संवासिनी से दुष्कर्म और गर्भपात को लेकर पुलिस स्तर से पॉजीटिव संकेत मिले तो शासन एसआईटी गठित कर जांच को तैयार हो गया। तत्कालीन एसपी सिटी अजय सिंह बताते हैं कि उस समय स्थिति अंधेरे में तीर चलाने जैसी थी, क्योंकि नारी निकेतन प्रबंधन इस सच को दबाने पर अड़ा था।

इसी बीच नारी निकेतन के आंगुतक रजिस्टर में कटिंग देखी तो शक गहराया। बताया गया कि एक संवासिनी को अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस अस्पताल पहुंची तो पता चला कि दो दिन में यहां दो संवासिनी लाई गईं। एक को बिल्डिंग की शिकायत थी। लेकिन, उसे भर्ती करने के बजाय नारी निकेतन कर्मचारी वापस ले गए। 

गार्ड ने पहचाना था संवासिनी को
अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन और 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारी के बयान से इस बात की पुष्टि हुई कि संवासिनी को लाया गया था। अब पहचान करने की चुनौती थी।

पुलिस ने कोशिश की थी फुटेज में नजर आ रही संवासिनी को नारी निकेतन के एक गार्ड ने पहचान लिया। यह गर्भपात के बाद 12वें दिन की बात है। 13वें दिन डीएम से अनुमति लेकर सुबह ही संवासिनी की मेडिकल जांच कराई गई तो पूरी कहानी सामने आ गई।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें