आखिरकर संवासिनी से दुष्कर्म और गर्भपात को लेकर पुलिस स्तर से पॉजीटिव संकेत मिले तो शासन एसआईटी गठित कर जांच को तैयार हो गया। तत्कालीन एसपी सिटी अजय सिंह बताते हैं कि उस समय स्थिति अंधेरे में तीर चलाने जैसी थी, क्योंकि नारी निकेतन प्रबंधन इस सच को दबाने पर अड़ा था।
इसी बीच नारी निकेतन के आंगुतक रजिस्टर में कटिंग देखी तो शक गहराया। बताया गया कि एक संवासिनी को अस्पताल ले जाया गया था। पुलिस अस्पताल पहुंची तो पता चला कि दो दिन में यहां दो संवासिनी लाई गईं। एक को बिल्डिंग की शिकायत थी। लेकिन, उसे भर्ती करने के बजाय नारी निकेतन कर्मचारी वापस ले गए।
गार्ड ने पहचाना था संवासिनी को
अस्पताल के सीसीटीवी फुटेज के अवलोकन और 108 एंबुलेंस सेवा के कर्मचारी के बयान से इस बात की पुष्टि हुई कि संवासिनी को लाया गया था। अब पहचान करने की चुनौती थी।
पुलिस ने कोशिश की थी फुटेज में नजर आ रही संवासिनी को नारी निकेतन के एक गार्ड ने पहचान लिया। यह गर्भपात के बाद 12वें दिन की बात है। 13वें दिन डीएम से अनुमति लेकर सुबह ही संवासिनी की मेडिकल जांच कराई गई तो पूरी कहानी सामने आ गई।