उत्तराखंड की राजनीति में उथल-पुथल की संभावना
पंडित रमेश सेमवाल ने कहा, उत्तराखंड की राजनीति में राहु का प्रभाव है और मंगल कम है। यही वजह है कि बीते 25 वर्षों में उत्तराखंड में कई बार राजनीति उथल-पुथल देखने को मिली है। आने वाले समय में भी राजनीतिक उथल-पुथल देखने को मिली सकती है। इस साल बहुत सारी समस्याएं उत्तराखंड में आने वाली हैं। हालांकि उत्तराखंड का बृहस्पति और शनि का प्रभाव आने वाले समय में अच्छा होगा और प्रदेश में निवेश बढ़ेगा।
प्राचीन विद्या पर आधारित है एआई
पंडित संतोष खंडूरी ने कहा, वर्तमान समय वास्तव में बहुत एडवांस है। आज के समय में लोग अपने सवालों का जवाब मोबाइल या लैपटॉप से ढूंढ लेते हैं लेकिन जिस मोबाइल में आप एआई के जरिये अपने सवालों को ढूंढ लेते हैं वह अशुद्ध और अपवित्र है। एआई आज का विषय नहीं है यह प्राचीन और बहुत पुरानी विद्या है। एआई गणनाएं कर सकता है, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति का विश्लेषण कर सकता है और उपलब्ध आंकड़ों के आधार पर संभावनाएं बता सकता है लेकिन ज्योतिष केवल डेटा आधारित विद्या नहीं है। इसमें वर्षों का अनुभव, व्यक्ति की परिस्थितियों की समझ, सांस्कृतिक संदर्भ और अंतर्ज्ञान की अहम भूमिका होती है जिसे मशीन में समाहित करना कठिन है।
हमारे ऋषि मुनियों के शोध का फल है एआई
आचार्य डॉ. सुशांत राज ने कहा, हमारी प्राचीन विद्या को अपडेट कर एआई को तैयार किया गया है। अगर हमारे ऋषि मुनियों ने तमाम तरह के शोध नहीं किए होते तो एआई इतना सफल नहीं होता। एआई की परिभाषा और उसका उद्देश्य वर्तमान में पूरी तरह से अलग है लेकिन उसके विकास में हमारी प्राचीन भारतीय विचारधाराओं का प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से योगदान नकारा नहीं जा सकता। उन्होंने कहा, ग्रहों की स्थिति देखकर यह कहा जा सकता है कि आने वाले समय में भूकंप और प्राकृतिक आपदा जैसी घटनाएं देखने को मिलेंगी। इन घटनाओं का अधिक प्रभाव प्रदेश के कुमाऊं क्षेत्र में ज्यादा देखने को मिलेगा। हालांकि इन आपदाओं में नियंत्रण पाने के लिए सरकार की ओर से पहले ही अच्छी तैयारी कर ली जाएगी। साथ ही इस साल भी बीते साल की तरह अधिक वर्षा होगी और इसका लाभ व नुकसान दोनों मिलेगा।
एक त्योहार-एक तिथि को बढ़ाना होगा
पंडित राम लखन गैराला ने कहा, हमें एक त्योहार एक तिथि की ओर बढ़ना होगा। धर्म रहेगा तो हमारी भारतीय संस्कृति सुरक्षित रहेगी और हम सुरक्षित रहेंगे। इसलिए इस ज्योतिष महाकुंभ में देश-विदेश के विद्वान आए हैं। कहा, एआई को सहायक उपकरण के रूप में देखा जाना चाहिए, न कि अंतिम निर्णायक के रूप में। कहा, ज्योतिष में प्रत्येक जातक की कुंडली को उसके जीवन, समय और परिवेश के अनुसार अलग-अलग तरीके से देखा जाता है। यही मानवीय दृष्टि ज्योतिष को विशिष्ट बनाती है।