अपने संबोधन में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि करीब चार हजार साल पुरानी भारतीय संस्कृति के साथ ही ज्योतिष की भी शुरूआत हुई।
पहले ज्योतिष केवल अवलोकन पर आधारित था, जिसके कई बिंदुओं को आज वैज्ञानिक मान्यता भी मिल चुकी है। विज्ञान की तरक्की के साथ इसमें कई चीजें जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि ज्योतिष और इससे जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध करने की आवश्यकता है।
पंडित केए दूबे पद्मेश ने कहा कि ज्योतिष ने अंधविश्वास को कम करने का काम किया है। प्रो. कमल घनशाला ने भविष्य में ग्राफिक एरा विवि में ज्योतिष का विभाग खोलने की घोषणा की। पंडित सतीश शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड ज्योतिष की भूमि है।
पंडित अजय भांबी ने कहा कि ज्योतिष लगातार सीखने वाला विषय है। इस अवसर पर शिवानी खेतान, गीतानंद सरस्वती, पंडित रामलखन गैरोला, विनोद पोखरियाल, कुमार गणेश, सतीश शर्मा, सिमरन समेत बड़ी संख्या में ज्योतिष व अन्य विद्वान मौजूद रहे।