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अमर उजाला ज्योतिष महाकुंभ का हुआ आगाज, नामी ज्योतिषियों से भाग्य जानने को उमड़ी भीड़

Thu, 02 May 2019 12:34 AM IST
अलका त्यागी न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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jyotish mahakumbh 2019 - फोटो : अमर उजाला
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योग और आयुर्वेद की तरह ज्योतिष भी भारतीय संस्कृति की पहचान है। ज्योतिष के जिन नियमों और सिद्धांतों को भारत में कई हजार वर्ष पहले से माना जाता है, आज दुनिया के तमाम देश उन्हें मान्यता दे रहे हैं।

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ज्योतिष ने योग और आयुर्वेद की तरह दुनिया में भारत का मान बढ़ाया है। आज दुनिया के कई देश इसको अपनाकर सम्मान दे रहे हैं। दो दिवसीय अमर उजाला-ग्राफिक एरा ज्योतिष महाकुंभ का शुभारंभ करते हुए राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने यह बात कही।

बुधवार को ग्राफिक एरा पर्वतीय विवि सभागार में ज्योतिष महाकुंभ का भव्य शुभारंभ हुआ। राज्यपाल बेबी रानी मौर्य, पंडित केए दूबे पद्मेश, ग्राफिक एरा ग्रुप ऑफ एजुकेशन के चेयरमैन प्रो. कमल घनशाला, वास्तुविद पंडित सतीश शर्मा, पंडित लेखराज शर्मा, पंडित अजय भांबी, विनोद त्यागी, डा. एचएस रावत, चंद्रशेखर शास्त्री, पंडित जयगोविंद शास्त्री, एस गणेश और सोहनी शास्त्री ने संयुक्त रूप से दीप प्रज्ज्वलित किया। ज्योतिष में उल्लेखनीय योगदान के लिए राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने प्रख्यात ज्योतिषी अजय भांबी को लाइफ टाइम अचीवमेंट अवॉर्ड प्रदान किया। साथ ही कई अन्य ज्योतिषियों को भी सम्मानित किया। 
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ये ज्योतिष रहेंगे आकर्षण का केंद्र

अपने संबोधन में राज्यपाल बेबी रानी मौर्य ने ज्योतिष के वैज्ञानिक स्वरूप पर विस्तार से रोशनी डाली। उन्होंने कहा कि करीब चार हजार साल पुरानी भारतीय संस्कृति के साथ ही ज्योतिष की भी शुरूआत हुई।

पहले ज्योतिष केवल अवलोकन पर आधारित था, जिसके कई बिंदुओं को आज वैज्ञानिक मान्यता भी मिल चुकी है। विज्ञान की तरक्की के साथ इसमें कई चीजें जुड़ी हैं। उन्होंने कहा कि ज्योतिष और इससे जुड़े विभिन्न विषयों पर शोध करने की आवश्यकता है।

पंडित केए दूबे पद्मेश ने कहा कि ज्योतिष ने अंधविश्वास को कम करने का काम किया है। प्रो. कमल घनशाला ने भविष्य में ग्राफिक एरा विवि में ज्योतिष का विभाग खोलने की घोषणा की। पंडित सतीश शर्मा ने कहा कि उत्तराखंड ज्योतिष की भूमि है।

पंडित अजय भांबी ने कहा कि ज्योतिष लगातार सीखने वाला विषय है। इस अवसर पर शिवानी खेतान, गीतानंद सरस्वती, पंडित रामलखन गैरोला, विनोद पोखरियाल, कुमार गणेश, सतीश शर्मा, सिमरन समेत बड़ी संख्या में ज्योतिष व अन्य विद्वान मौजूद रहे।
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