उत्तराखंड भवन एवं अन्य संन्निर्माण, कर्मकार कल्याण बोर्ड में भर्तियों के अलावा श्रमिकों का हक मारने का मामला भी प्रकाश में आया है। बोर्ड के दफ्तरों के माध्यम से जो भी साइकिलें और मशीनें श्रमिकों को बांटी गई हैं, उनमें बड़े पैमाने पर गड़बड़ियां हुई हैं। इसकी जांच सभी लेबर कमिश्नर के स्तर पर शुरू कर दी गई है।
सूत्रों के मुताबिक, कर्मकार बोर्ड की ओर से श्रमिकों को साइकिल बांटने का अभियान चलाया गया था। पहले आम आदमी पार्टी की टोपी पहने व्यक्ति द्वारा साइकिलें बांटने का फोटो वायरल होने के बाद अब एक और तस्वीर वायरल हो रही है। इस तस्वीर में एक व्यक्ति 80 लाख की कार में सवार होकर आया। श्रमिक बनकर साइकिल ली और फिर साइकिल को कार में रखकर लौट गया।
यह तस्वीर अध्यक्ष तक पहुंचने के बाद सभी श्रमिकों को हुए साइकिल और मशीन आवंटन की जांच बैठा दी गई। कर्मकार बोर्ड की सचिव की ओर से सभी श्रम आयुक्त, अपर श्रम आयुक्त, उप श्रम आयुक्त को जांच के लिए पत्र भेजा गया है।
इस जांच के तहत एक ओर जहां राज्य में पंजीकृत 3.60 लाख श्रमिकों का वेरिफिकेशन किया जा रहा है तो दूसरी ओर साइकिल और मशीनें लेने वालों की भी जांच पड़ताल की जा रही है। बोर्ड के अध्यक्ष शमशेर सिंह सत्याल का कहना है कि जिन लोगों ने भी श्रमिकों का हक मारा होगा, उन्हें बख्शा नहीं जाएगा। सरकार से मिलने वाली राशि हो या साइकिल, मशीन। गलत तरीके से इनका लाभ लेने वालों से वसूली की जाएगी।
कर्मकार बोर्ड ने सभी तरह के भुगतान पर लगाई रोक
कर्मकार बोर्ड ने साइकिल आवंटन में गड़बड़ी सामने आने के बाद एक ओर जहां साइकिल सप्लाई करने वाली कंपनी का भुगतान रोक दिया है तो दूसरी ओर अन्य भुगतान पर भी रोक लगा दी गई है। केवल पहले से चल रही योजनाओं के तहत पंजीकरण व श्रमिकों को राहत के काम किए जा रहे हैं।
साइकिल आवंटन में विवाद होने के बाद बोर्ड ने इस तरह के सभी भुगतान पर रोक लगा दी है। बैंक को भी निर्देश दे दिए गए हैं कि ऐसे किसी भी बिल का बोर्ड के संज्ञान में लाए बिना भुगतान न किया जाए।
-दीप्ति सिंह, सचिव, कर्मकार बोर्ड