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उत्तराखंड में अमर उजाला के 24 साल पूरे, अखबार के दीवाने हैं देहरादून के पंडित गंगा प्रसाद, तस्वीरें

Thu, 25 Feb 2021 10:36 AM IST
Nirmala Suyal Nirmala Suyal न्यूज डेस्क, अमर उजाला, देहरादून
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पंडित गंगा प्रसाद - फोटो : अमर उजाला
पाठकों का प्यार और विश्वास अमर उजाला की ताकत रही है। यही कारण है कि एक शख्स न केवल उमर उजाला के विगत 25 सालों से नियमित पाठक हैं, बल्कि अमर उजाला के प्रति उन्हें इतना प्यार है कि उन्होंने 24 साल की प्रतियों को भी सहेज कर रखा है।  24 साल से अमर उजाला के साथ जुड़े यह शख्स हैं पंडित गंगा प्रसाद सुरीरा। वे मूल रूप से ग्यारह गांव हिंदाव के ग्राम मुंडेपी के रहने वाले हैं और वर्तमान में एमडीडीए कॉलोनी नेहरूपुरम कांवली रोड पर रहते हैं। पंडित गंगा प्रसाद सुरीरा बताते हैं कि वे सरस्वती से हमेशा प्यार करते रहे हैं। अखबार के प्रति विश्वास और प्यार की उनकी दिलचस्प कहानी है। उन्होंने बताया कि एक बार वे दरबार में पूजा पाठ करने गए थे। वहां उन्हें किसी अखबार का एक पुराना टुकड़ा मिला, जिसमें महात्मा गांधी के जेल जाने की बात छपी थी। उसके बाद उन्होंने तय किया कि वे भी कुछ ऐसी ही चीजों का संग्रह करेंगे जो बाद में काम आ सकें। उनका यह विश्वास जगा अमर उजाला के प्रति। पंडित गंगा प्रसाद सुरीरा बताते हैं कि वे 1994 से नियमित अमर उजाला पढ़ रहे हैं। दून में या कहीं बाहर भी जाते हैं तो वे अमर उजाला देहरादून की प्रति लेना कभी नहीं भूलते।
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पंडित गंगा प्रसाद - फोटो : अमर उजाला
कभी अगर गलती से अखबार मिस हो गया या कोई ओर ले गया तो वे रेलवे स्टेशन जाकर दूसरी प्रति ले आते थे। 2019 तक के उनके पास अमर उजाला देहरादून की प्रत्येक दिन की प्रति मौजूद है, जिन्हें उन्होंने सुरक्षित तरीके से सहेज रखा है। 
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पंडित गंगा प्रसाद - फोटो : अमर उजाला
पंडित गंगा प्रसाद सुरीरा का कहना है कि उनका अपना मकान नहीं है। लिहाजा, उन्हें मकान बदलने पड़ते हैं। जगह की कमी के कारण पिछले दो साल से उन्होंने प्रतियों को सहेजना बंद कर दिया है। फिर भी वे नियमित रूप से अमर उजाला के पाठक हैं। 

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पंडित गंगा प्रसाद - फोटो : अमर उजाला
पंडित गंगा प्रसाद बताते हैं कि पुराने अखबार की एक प्रति के लिए उन्हें कई बार दस हजार रुपये तक के ऑफर मिले, लेकिन उन्होंने इसके बाद भी अखबार की एक भी प्रति नहीं बेची। आज भी कई लोग उनकी मदद मांगते हैं, वे अखबार की फोटो प्रति देकर जरूरतमंदों की मदद करते हैं। 
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समाचार पत्र - फोटो : पेक्सेल्स
पंडित गंगा प्रसाद बताते हैं कि अखबारों को सहेजने में बड़ी दिक्कत आ रही है। वे पिछले 24 सालों से बड़ी मुश्किल से अखबार को सुरक्षित रख रहे हैं। मकान बदलते वक्त अखबार की कोई प्रति मिस न हो इसका वे पूरा ध्यान रखते हैं। यही नहीं अखबार के पेज खराब न हों इसके लिए भी वह समय-समय पर लाइब्रेरियों से मदद मांगते रहते हैं।
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