अमर उजाला के अपनत्व अभियान को पाठकों का अपनत्व मिला है। ऐेसे बच्चों के बारे में लोग हमें सूचनाएं दे रहे हैं जिन्होंने कोरोना के दौरान माता-पिता अथवा एकल कमाई वाले परिजन को गंवा दिया। ऐसे बच्चों के सामने खाने-पीने के साथ ही पढ़ाई के साथ ही सिर पर एक वात्सल्य भरे हाथ की भी दरकार है।
उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों से उनके माता-पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उनकी पहचान के लिए यह अभियान शुरू किया है। ऐसे बच्चों के बारे में जानकारी हो तो हमें
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अमर उजाला अपनत्व अभियान : दुश्वार हुआ जीना, कोरोना ने पिता का साया, मां का आंचल छीना
पिता की मौत के बाद कोरोना से मां ने भी छोड़ा साथ, तीन बच्चे हो गए अनाथ
खटीमा में टेंट का कारोबार करने वाले जयप्रकाश गुप्ता का आठ माह पहले सीने में दर्द उठने के चलते निधन हो गया था। उसके बाद जैसे तैसे उनकी पत्नी विमला गुप्ता ने टेंट का कारोबार संभाला। हाल ही में उनकी भी कोरोना से मौत हो गई। अब उनके तीनों बच्चे अनाथ हो गए हैं। उन्होंने सरकार से नौकरी की गुहार लगाई है।
खटीमा के लोहिया हेड रोड निवासी शिवम गुप्ता ने बताया कि बीते 12 मई को बरेली से खटीमा लाते वक्त मां का देहांत हो गया था। कुछ दिनों पहले ही मां की तबीयत बिगड़ने पर उन्हें पीलीभीत के एक निजी अस्पताल में भर्ती कराया गया था। कोरोना पॉजिटिव होने के बाद इलाज में सुधार न होने पर विमला गुप्ता को बरेली के एक अस्पताल में इलाज के लिए ले जाया गया।
वहां डॉक्टर ने उन्हें ब्रेन हेमब्रेज होने की बता कही। अस्पताल में बेड खाली नहीं होने पर खटीमा लाते समय उनकी रास्ते में ही मृत्यु हो गई थी। बताया कि आठ माह पहले पिता जयप्रकाश की अचानक सीने में दर्द उठने से अस्पताल में ही मौत हो गई थी।
कोरोना काल में टेंट कारोबार चौपट होने से तीनों भाई-बहन घर में ही बैठे हैं। शिवम ने बताया कि घर में उनकी बहन शिवानी गुप्ता और उससे बड़ी बहन दिव्या गुप्ता हैं। तीनों भाई-बहन कॉलेज में पढ़ाई कर रहे हैं। बताया कि वह एमए की पढ़ाई कर रहे हैं, जबकि बड़ी बहन दिव्या गुप्ता ने एमएससी की है। छोटी बहन ने बीएससी और बी. फार्मा किया है। उन्होंने सरकार से नौकरी और आर्थिक मदद की गुहार लगाई है।
कोटद्वार : सृष्टि और वरुण के सिर से उठा मां का साया
शहर से सटे सिताबपुर निवासी सृष्टि और वरुण की मां को कोविड महामारी ने छीन लिया। मां की मौत के बाद दोनों बच्चे अनाथ हो गए। बीमारी के कारण दस साल पहले उनके पिता उन्हें छोड़कर चले गए थे। पिता के हिस्से का भी प्यार दे रही मां रजनी दोनों को बड़े प्यार से पाल रही थी, लेकिन नियति को शायद यह भी मंजूर नहीं रहा। बीते 28 अप्रैल को तीन दिन के बुखार के बाद मां रजनी काला भी उन्हें हमेशा के लिए छोड़ गईं।
माता-पिता की मौत के बाद सृष्टि (20) और उसका भाई वरुण (17) अपने मामा एडवोकेट अनुज भट्ट के साथ रह रहे हैं। अनुज भट्ट बताते हैं कि रजनी उनकी बड़ी बहन थीं और जीजा प्रदीप काला शिक्षक थे। बीमारी के कारण दस साल पहले उनका निधन हो गया और उनके स्थान पर रजनी दीदी को शिक्षा विभाग में क्लर्क की नौकरी मिली थी।
वर्तमान में वह वरिष्ठ सहायक (हेड क्लर्क) के पद पर जीआईसी जयदेवपुर सिगड्डी में सेवारत थीं। रजनी बच्चों को मां के साथ ही पिता का भी प्यार दुलार दे रही थीं। बीते अप्रैल माह के अंतिम सप्ताह में उसकी तबीयत बिगड़ी तो वह उसे लेकर बदरीनाथ मार्ग स्थित एक निजी क्लीनिक ले गए, जहां कोविड का संदेह होने पर उसका एक्सरे कराया, जिसमें कोविड की पुष्टि हुई।
घर पर आइसोलेट रहने के दौरान उनकी दवाइयां चल रही थीं। उपचार के दौरान 28 अप्रैैल को उन्होंने दम तोड़ दिया। कोविड ने बच्चों से उनकी मां भी छीन ली। पिता के बाद मां की मौत से बच्चे असहाय हो गए हैं। मानसिक रूप से कमजोर होने के कारण सृष्टि दसवीं से आगे पढ़ाई नहीं कर सकी।