विभागीय अधिकारियों का कहना है कि इस तरह के बच्चों का पता तो लगाया जा रहा है, लेकिन शासनादेश जारी होने के बाद ही यह स्पष्ट हो पाएगा कि बच्चों को माता पिता दोनों में से किसी एक की मौत पर भी बच्चे को इसका लाभ मिलेगा या नहीं।
अनाथ हुए बच्चों को किस तरह की मदद की जानी है, शासनादेश जारी होने के बाद ही इस पर स्थिति स्पष्ट हो पाएगी। फिलहाल विभागीय अधिकारी अपनी तैयारी के तौर पर कोविड से माता पिता को खो चुके बच्चों के साथ ही दोनो में से किसी एक को खो चुके बच्चों का भी पता लगाने में जुटे हैं।
पिछले दो महीने में कोविड से कमाऊ सदस्य की मौत के 114 मामले
प्रदेश में पिछले दो महीने के भीतर कोविड से अपने माता पिता को खो चुके 9 बच्चों का पता चला है। इसके अलावा माता पिता में से एक की पहले और एक की वर्तमान में कोविड से मौत के 14 मामले सामने आए हैं।
कोविड से कमाऊ सदस्य की मौत के अब तक 114 प्रकरण मिले हैं। जिसमें उत्तरकाशी में 14, पिथौरागढ़ में 7, टिहरी गढ़वाल में 13, पौड़ी गढ़वाल में 2, नैनीताल में 20, हरिद्वार में 35, देहरादून में 14, चंपावत में 5 एवं चमोली में कमाऊ सदस्य के मौत के चार मामले सामने आए हैं।
अमर उजाला के अभियान के बाद हरकत में आया विभाग
उत्तराखंड में कोरोना महामारी ने जिन बच्चों के माता पिता को छीन लिया है। अमर उजाला ने उन बच्चों की पहचान के लिए अभियान चलाया हुआ है। अमर उजाला के इस अभियान के बाद ही विभिन्न जिलों में अधिकारी हरकत में आए। जिसके बाद इस तरह के बच्चों की संख्या लगातार बढ़ रही है।
सरकार ने वात्सल्य योजना का प्रस्ताव तैयार कर लिया है, मुख्यमंत्री इसे विशेषाधिकार से मंजूरी दे सकते हैं, इस बीच इसमें इस वजह से कुछ देरी हुई है कि केंद्र सरकार की ओर से भी इस तरह के बच्चों के लिए घोषणा की गई है, प्रदेश सरकार को केंद्र के जीओ का इंतजार है, ताकि प्रस्ताव में कुछ छूट रहा हो तो उसे कवर किया जा सके।
- रेखा आर्य, राज्यमंत्री महिला सशक्तीकरण एवं बाल विकास