उन्होंने सपा और बसपा के गठबंधन पर कहा कि समाजवादी पार्टी का राजनीतिक पतन हो रहा है। और समाजवादी नेता जानते हैं कि बिना हाथी की पीठ की सवारी के अस्तित्व बचा पाना कठिन है।
सपा की रीढ़ की हड्डी शिवपाल हैं। यदी वह कांग्रेस में चले जाते हैं। तो ये दल और छोटे-छोटे दल मिलकर क्या नरेंद्र मोदी के विराट व्यक्तित्व को चुनौती दे सकेंगे।
अमर सिंह ने कहा कि मेरी प्रतिबद्धता मोदी के साथ हैं। मुझे किसी पद की अभिलाषा नहीं है। 24 साल मैंने राजनीति कर ली है। अब मैं राष्ट्रनीति करना चाहता हूं। मेरी आवाज, मेरा चेहरा और मेरी पहचान नरेंद्र मोदी के लिए है।
कहा कि पिछले 20 सालों से मायवती मुलायम सिंह पर चीर और शील हरण का मुकदमा चला रही हैं। और वह मुकदमा मुलायम सिंह राज्य में जीत गए हैं। सुप्रीम कोर्ट में यह केस चल रहा है। क्या मायावती यह मुकदमा हटाने के लिए तैयार हैं? या मायावति के नए प्रवक्ता मुलायम सिंह के पुत्र और समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव भी इस बात से सहमत है कि उनके पिता पर लगे आरोप सही हैं। उसकी सजा उन्हें मिलनी चाहिए।
क्योंकि सपा के पांच साल के शासन काल में मुलायम सिंह खिलाफ ये जो झूठा आरोप लगा था इसका निराकरण अखिलेश कर सकते थे। लेकिन उनकी सरकार ने अपने पिता के विरुद्ध लगाए गए आरोपों पर कुछ नहीं किया।