राजनीति में न तो कोई स्थायी दुश्मन होता है और न ही घर वापसी की कोई बाध्यता। सारे गिले-शिकवे भुलाकर अमर सिंह एक बार फिर समाजवादी पार्टी में जाने के लिए मुलायम दिख रहे हैं।
लखनऊ के एक कार्यक्रम में नेताजी (मुलायम सिंह) के निकट पहुंचने पर अमर सिंह का हृदय परिवर्तन होना लाजिमी है। हालांकि चार साल पहले जो अमर सिंह सपा छोड़कर गए थे अब वैसे नहीं रहे।
अमर सिंह खुद कहते भी हैं कि जो अमर सिंह दिख रहा है वो मैं नहीं हूं। अमर सिंह बुधवार को देहरादून में थे और शाम को मुख्यमंत्री हरीश रावत से मिलने भी पहुंचे। रावत से अमर सिंह की बातचीत निजी और गोपनीय रही।
अब सपा के लिए उतना नहीं कर सकता
भविष्य की राजनीति को लेकर उनका कहना है कि निश्चित रूप से सोचना पड़ेगा। समाजवादी पार्टी में वापसी पर उनका कहना है कि उन्हें बताएंगे कि मैं अब बीमार हूं। मेरे परिवार और मेरे बच्चों को मेरी जरूरत है।
मुझे हर तीसरे महीने सिंगापुर इलाज केलिए जाना पड़ता है। आपको जो दिख रहा मैं वो अमर सिंह नहीं हूं, जिस अमर सिंह को वो ढूंढ रहे हैं अब वो नहीं हूं।
मैंने तब जितना समाजवादी पार्टी के लिए किया अब मैं वो नहीं कर सकता हूं। इस सच्चाई के साथ यदि वो मुझे स्वीकार करेंगे तो बात हो सकती है।
रिश्तों की कड़वाहट आई सामने
अमर सिंह ने समाजवादी पार्टी में उनका विरोध करने वालों को भी स्पष्ट मैसेज देने कोशिश की है। उन्होंने मैं वहां राजनीति करने के लिए नहीं और न ही राज्यसभा की सदस्यता के लिए जाऊंगा।
मैं जया बच्चन की तरह ओछा व्यक्ति नहीं हूं। जो जया बच्चन कभी अमर सिंह की ‘भाभी’ हुआ करती थीं उनके प्रति तीखी टिप्पणी कर अमर सिंह ने अपनी चुप्पी तोड़ी है।