रुद्रप्रयाग के ऊखीमठ ब्लाॅक में तीर्थ पुरोहितों के गांव रुद्रपुर में गोचर भूमि को लेकर पूर्व विधायक केदारनाथ मनोज रावत ने ग्रामीणों के साथ प्रेसवार्ता की। उन्होंने 220/33 केवी उप-स्टेशन के निर्माण में प्रशासन की भूमिका पर सवाल उठाए। कहा, ग्रामीणों की पूरी जमीन पिटकुल को दे दी गई है।
पूर्व विधायक मनोज रावत ने कहा कि रुद्रपुर गांव में 1974 में जमीन का एक हिस्सा अनुसूचित जाति के भूमिहीन परिवारों को दिया गया, जबकि शेष भूमि हमेशा गोचर के रूप में ही अंकित रही। आरोप लगाया कि पिटकुल ने 2008 से इस भूमि पर कब्जा करने के लिए योजनाएं बनानी शुरू कर दी थीं और 2010 में वन विभाग ने इस भूमि को 30 साल की लीज पर पिटकुल को दे दिया। उन्होंने आरोप लगाया कि पिटकुल ने प्रशासनिक अधिकारियों और सरकारी कर्मचारियों से मिलकर साजिश रची और फर्जी दस्तावेज के आधार पर लीज हासिल की। इसके विरोध मेें रुद्रपुर के ग्रामीण उच्च न्यायालय का रुख कर चुके हैं और 2021 में उच्च न्यायालय ने जिला प्रशासन को इस मामले की सुनवाई का आदेश दिया था। मामले की अगली सुनवाई 24 मार्च को होनी है। कहा कि 10 मार्च को जब स्थानीय प्रशासन ने पुलिस बल, पिटकुल कर्मचारियों और ठेकेदारों के साथ गोचर भूमि पर कब्जे का प्रयास किया था तब गांव की महिलाओं ने अपनी भूमि बचाने के लिए संघर्ष किया। इस मौके पर गणेश शुक्ला, शैलेंद्र कोटवाल, पंकज शुक्ला, अमित आदि मौजूद रहे।