अपर जिला एवं सत्र न्यायाधीश नंदन सिंह ने रिसॉर्ट निर्माण के नाम पर 50 लाख रुपये की संपत्ति हड़पने के आरोप में दर्ज मामले में न्यायिक मजिस्ट्रेट का चार जनवरी 2024 का आदेश निरस्त कर दिया। सोमवार को सुनाए फैसले में अदालत ने प्राथमिकी दर्ज करने की मांग वाला प्रार्थना पत्र खारिज करने को विधिक त्रुटि माना। मामला दोबारा सुनने के निर्देश दिए गए हैं।
नई दिल्ली के नार्थ वेस्ट, शालीमार बाग निवासी जगत प्रिय सत्यार्थी और उनकी पत्नी रुचि सत्यार्थी ने यह निगरानी दायर की थी। उन्होंने देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित एटीएस सोसायटी निवासी मयंक अवस्थी, शालीमार बाग निवासी राजेश ढौंडियाल और होरोवाला निवासी रणधीर कुमार समेत अन्य पर आरोप लगाए।
उन्होंने बताया कि भवन निर्माण का अनुबंध हुआ था, जिसमें छह माह के भीतर तय लेआउट के अनुसार निर्माण होना था। पांच सितंबर 2018 को पंजीकृत अनुबंध में 27,917 रुपये मासिक किराया तय हुआ। पूरी रकम लेने के बावजूद न कब्जा दिया गया, न निर्माण हुआ। किराया भी मार्च 2020 से बंद कर दिया गया। जान से मारने की धमकी देने का भी आरोप है।
अदालत ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट के ललिता कुमारी मामले के अनुसार संज्ञेय अपराध दिखने पर एफआईआर और जांच अनिवार्य है। जमीन कृषि योग्य थी, मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण से रिसॉर्ट निर्माण की अनुमति भी नहीं थी। न्यायालय ने इसे केवल दीवानी विवाद नहीं, बल्कि गहरी आपराधिक साजिश का संकेत माना।