इलाहाबाद हाईकोर्ट ने रामपुर तिराहा कांड के मामले में रजिस्ट्रार जनरल को मुकदमों की प्रगति रिपोर्ट प्रस्तुत करने के आदेश दिए हैं। हाईकोर्ट ने देहरादून के रविंद्र जुगरान द्वारा पीड़ितों को 24 साल बाद भी इंसाफ न मिलने को लेकर दायर याचिका पर यह आदेश दिया है। अगली सुनवाई के लिए 25 जनवरी की तिथि निर्धारित की गई है।
उत्तराखंड को अलग राज्य बनाने की मांग को लेकर दिल्ली जा रहे लोगों पर एक अक्तूबर 1994 की रात यूपी पुलिस ने मुजफ्फरनगर के रामपुर तिराहे पर लाठीचार्ज करने के साथ फायरिंग कर दी थी, जिसमें प्रदेश के सात लोगों की मौत हो गई थी, जबकि 17 लोग जख्मी हुए थे। उस समय पुलिस कहर से बचने के लिए जंगलों की तरफ भागीं महिलाओं की अस्मत से भी खिलवाड़ किया गया था। इस मामले में सीबीआई ने जांच के बाद आरोपी पुलिस कर्मियाें के खिलाफ कई मुकदमे दर्ज किए थे। राज्य गठन के बाद सत्ता में आई भाजपा और कांग्रेस ने दोषियाें को सजा दिलाने की हुंकार तो भरी, लेकिन वक्त के साथ रामपुर तिराहा कांड प्राथमिकता से बाहर होता चला गया। तीन मुकदमों की फाइल आरोपी पुलिस कर्मियाें की मौत की वजह से बंद हो गई, जो मुकदमे बचे भी हैं, उनमें कमजोर पैरोकारी का पूरा फायदा आरोपियों को मिल रहा है।
रामपुर तिराहा कांड के पीड़ितों को लंबे समय बाद भी इंसाफ न मिलने को लेकर देहरादून के रविंद्र जुगरान ने इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दायर की थी। याचिका में रामपुर तिराहा कांड के चार मुकदमों को समयावधि में निस्तारित करने की मांग की गई है। जुगरान के अधिवक्ता सर्वानंद पांडेय और रविंद्र त्रिपाठी ने बताया कि बृहस्पतिवार को हुई सुनवाई में हाईकोर्ट ने रजिस्ट्रार जनरल से इन मुकदमों की प्रगति रिपोर्ट उपलब्ध कराने के आदेश दिए है। सुनवाई के लिए अब 25 जनवरी की तिथि निर्धारित की गई है।