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बदरीनाथ और हेमकुंड की राह होगी आसान

Tue, 28 Feb 2017 01:23 PM IST
प्रमोद सेमवाल/ अमर उजाला, गोपेश्वर
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danger zone, badrinath highway, chardham yatra - फोटो : file photo
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ऑल वेदर रोड योजना का काम पूरा होने पर ऋषिकेश से बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब की दूरी 17 किलोमीटर तक घट जाएगी। योजना के तहत बदरीनाथ हाईवे पर जोशीमठ से करीब 12 किमी पहले हेलंग से मारवाड़ी तक चट्टान काटकर सड़क बनाई जाएगी। इस सड़क के बनने से 22 किलोमीटर की दूरी घटकर पांच किलोमीटर रह जाएगी।
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अभी ऋषिकेश से बदरीनाथ धाम 296 किमी और हेमकुंड साहिब का मुख्य सड़क पड़ाव गोविंदघाट 273 किलोमीटर की दूरी पर स्थित है। अभी बदरीनाथ हाईवे जोशीमठ से होकर गुजरता है। हाईवे पर हेलंग से जोशीमठ होते हुए मारवाड़ी की दूरी 22 किलोमीटर है। अब ऑल वेदर रोड योजना के तहत नई सड़क बनने पर बदरीनाथ या हेकुंड साहिब की यात्रा पर आने वाले यात्रियों को जोशीमठ नहीं आना पड़ेगा। वह हेलंग से पांच किमी का सफर तय कर सीधे मारवाड़ी पहुंच सकेंगे। तीर्थयात्रियों का 17 किमी का फेर बच जाएगा।

केंद्रीय परिवहन मंत्रालय के क्षेत्रीय अधिकारी उमेश कटारा का कहना है कि मौजूदा समय में हेलंग से जोशीमठ होते हुए मारवाड़ी तक 22 किलोमीटर हाईवे बेहद संकरा और घुमावदार है, जबकि हेलंग से मारवाड़ी तक बनने वाला मार्ग सुगम और कम दूरी की होगा। यह मार्ग डबल लेन का बनेगा। उनके मुताबिक पीपलकोटी तक ऑल वेदर रोड का कार्य तेजी पर है, चालू वर्ष से ही हेलंग से मारवाड़ी तक हाईवे का निर्माण कार्य भी शुरू हो जाएगा। 
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बदरीनाथ हाईवे से अलग-थलग पड़ जाएगी जोशीमठ नगरी 
हेलंग से मारवाड़ी तक अलग सड़क बनने से धार्मिक और पर्यटन नगरी जोशीमठ बदरीनाथ हाईवे से अगल-थलग हो जाएगी। अभी तक जोशीमठ नगर बदरीनाथ और हेमकुंड साहिब का मुख्य प्रवेश द्वार माना जाता है। तीर्थयात्री जोशीमठ में नृसिंह मंदिर के दर्शन करने के बाद ही अपनी बदरीनाथ यात्रा शुरू करते हैं, जबकि हेमकुंड साहिब के दर्शन कर तीर्थयात्री रात्रि विश्राम के लिए जोशीमठ गुरुद्वारे में पहुंचते हैं। जोशीमठ से ही हिम क्रीड़ा स्थली औली भी जाया जाता है। ऐसे में हेलंग से मारवाड़ी तक हाईवे का नवनिर्माण होने से जोशीमठ में तीर्थयात्रियों और पर्यटकों की आवाजाही कम हो जाएगी। 

सेना का दबाव भी झेल रहा था बीआरओ  
चमोली जिला धार्मिक के साथ ही सामरिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण है। जिले में नीती और माणा घाटी चीन सीमा से जुड़ी हुई हैं। सीमा क्षेत्र में अपनी सैन्य क्षमता को बढ़ाने के लिए भारत अपने बड़े सैन्य उपकरण सीमा क्षेत्र में पहुंचाना चाहता है, लेकिन बदरीनाथ हाईवे की दयनीय स्थिति के चलते अभी तक यह संभव नहीं हो पा रहा था। सेना लगातार बीआरओ पर इस बाईपास मार्ग को बनाने के लिए दबाव बना रही थी, लेकिन स्थानीय लोगों के विरोध के कारण बाईपास मार्ग नहीं बन पा रहा था।
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