जोशी के मुताबिक, सेमिनार का एजेंडा तकरीबन तैयार है। इस आयोजन का मुख्य ध्येय देश भर में आरक्षण के खिलाफ चल रही अलग-अलग संघर्षों को एक मंच पर लाकर उसे विराट आंदोलन में तब्दील करना है। दूसरा उद्देश्य केंद्र पर आरक्षण की व्यवस्था को समाप्त कराने का है। अखिल भारतीय समानता मंच के राष्ट्रीय महासचिव विनोद नौटियाल के मुताबिक, भारत के संविधान में आरक्षण की व्यवस्था 10 साल के लिए की गई थी।
केंद्र की सरकारें इस मियाद को बढ़ाती आई हैं। 25 जनवरी 2020 को आरक्षण के 10 साल पूरे होने जा रहे हैं। इससे पहले मंच के तहत देश भर के कर्मचारी केंद्र सरकार पर दबाव बनाएंगे कि वह आरक्षण की व्यवस्था की जारी न रखे।
सेमिनार में इसके लिए भी रणनीति बनेगी। इसके अलावा प्रमोशन में आरक्षण के खिलाफ आंदोलन की रूपरेखा भी तैयार होगी। अदालतों में चल रहे मामलों में आरक्षण के खिलाफ मजबूत पैरवी को लेकर मंथन होगा और उसमें समस्त कर्मचारियों से सहयोग का आह्वान किया जाएगा।