शास्त्रों के अनुसार कुंभ स्नान का मुहूर्त 2021 में ही है। इसलिए कुंभ के आयोजन पर कोई संशय नहीं है। कुंभ बजट की पहली किस्त जारी होने के बाद अखाड़ों में स्थायी निर्माण शुरू हो जाएंगे। उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ हुई बैठकों में कुंभ के दौरान संतों व श्रद्धालुओं को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने की मांग अखाड़ा परिषद ने रखी है।
मुख्यमंत्री ने सकारात्मक रुख दिखाते हुए समय पर सभी कार्य पूरे कराने और उच्च स्तरीय सुविधाएं उपलब्ध कराने का आश्वासन दिया है। उन्हाेंने कहा कि मुख्यमंत्री के साथ होने वाली अगली बैठक में एक बार फिर सभी मुद्दों पर विस्तार से चर्चा की जाएगी। मौके पर भाजपा के पूर्व जिलाध्यक्ष ओम प्रकाश जमदग्नि समेत कई संत व नेता मौजूद थे।
कुंभ के कार्य समय पर पूरे करने का दिया आश्वासन
शहरी विकास मंत्री मदन कौशिक ने भी निरंजनी अखाड़ा में अखाड़ा परिषद के अध्यक्ष श्रीमहंत नरेंद्र गिरि से मुलाकात की। उन्होंने कहा है कि महाकुंभ से संबंधित सभी कार्य समय पर पूरे कर लिए जाएंगे। कोविड-19 के चलते तैयारियों पर कुछ असर जरूर पड़ा है, लेकिन अब कार्यों में रफ्तार आई है। कुंभ मेले को 2022 में कराने का सुझाव देने वाले महामंडलेश्वर स्वामी यतीद्रानंद गिरि महाराज ने भी अखाड़ा पहुंचकर श्रीमहंत नरेंद्र गिरि से मुलाकात की और कहा कि उन्होंने अपनी ओर से सुझाव दिया था। कुंभ के आयोजन का निर्णय अखाड़ा परिषद को करना है। अखाड़ा परिषद जो निर्णय करेगी, उसी के अनुसार ही कुंभ होगा।