रामनगर (नैनीताल) स्थित कॉर्बेट टाइगर रिजर्व (सीटीआर) में घूमने के लिए अब पर्यटकों की इस जरूरी सुविधा में बड़ा बदलाव किया गया है।
कॉर्बेट पार्क में पंजीकृत 250 जिप्सियों को पर्यटक अब ऑनलाइन बुक करा सकेंगे। इसकी मांग लंबे समय से की जा रही थी, लेकिन कुछ दिन पूर्व परमिट मिलने के बावजूद इलाहाबाद हाइकोर्ट के जज को जिप्सी न मिलने के कारण लौटना पड़ा तो सीटीआर प्रशासन ने शनिवार से यह बदलाव कर दिया।
सीटीआर में चंद घंटे के लिए दिवसीय भ्रमण के साथ ही घने जंगल में बने एफआरएच में रात्रि विश्राम की सुविधा भी मिलती है।
यहां कराएं ऑनलाइन बुकिंग
online
इसके लिए कॉर्बेट नेशनल पार्क की बुकिंग वेबसाइट www.corbettonline.uk.gov.in पर अग्रिम बुकिंग ऑनलाइन करानी होती है।
सीटीआर के उपनिदेशक अमित वर्मा ने बताया कि पर्यटकों की सुविधा के मद्देनजर कॉर्बेट में पंजीकृत जिप्सियों की सूची भी इस वेबसाइट पर ऑनलाइन अपलोड कर दी गई है। पर्यटक इस सूची को डाउनलोड कर सकते हैं।
इसमें कॉर्बेट में पंजीकृत जिप्सी का नंबर, उनके मालिकों के मोबाइल नंबर, जोनवार निर्धारित किराया सूची भी अंकित है ताकि पर्यटक बुकिंग कराते समय जिप्सी स्वामी से बात कर उक्त नंबर की जिप्सी नंबर दर्ज कर वन विश्राम भवन (एफआरएच) समेत जिप्सी की भी बुकिंग करा लें।
कई बार सीटीआर में जिप्सियों की कमी हो जाती है
corbett tiger reserve
- फोटो : google
कॉर्बेट में सीमित एफआरएच होने के कारण वहां रोजाना करीब 150 जिप्सियों को ही प्रवेश की अनुमति दी जाती है जबकि इससे सटे कॉर्बेट लैंडस्केप के जंगल में बने पवलगढ़ कंजर्वेशन रिजर्व (पीसीआर) के सीतावनी क्षेत्र में अभी वाहनों की अधिकतम संख्या तय नहीं है।
इसी कारण क्षमता से अधिक पर्यटक आने पर सभी जिप्सियां सीतावनी की ओर चली जाती हैं।
ऐसे में जिप्सी संचालकों की सूची ऑनलाइन न होने के कारण कई बार सीटीआर में जिप्सियों की कमी हो जाती है। जिप्सी संचालकों की सूची ऑनलाइन होने से उम्मीद है कि यहां आने पर पर्यटकों को जिप्सियों की कमी नहीं खलेगी।
गश्त के लिए वनकर्मियों की छुट्टियां निरस्त
tiger stops tourist way in corbett park
कॉर्बेट नेशनल पार्क में नये साल को लेकर वन्यजीवों की सुरक्षा के मद्देनजर सुरक्षा बढ़ा दी गई है। सीटीआर के उपनिदेशक अमित वर्मा ने बताया कि नये साल के मौके पर पर्यटकों की संख्या बढ़ जाती है।
गाड़ियों की आवाजाही भी रात-दिन होती है, जिसके मद्देनजर पार्क की सीमाओं पर वन्यजीवों की सुरक्षा बढ़ा दी गई है।
रात में एंबुस लगा रात-दिन गश्त की जा रही है, दिन में हाथियों के साथ वह रात को पैदल, गाड़ियों, कुत्तों के साथ गश्त की जा रही है। यह सिलसिला एक जनवरी तक चलेगा। इस बीच सभी वनकर्मियों की छुट्टियां भी निरस्त की गई हैं। यदि कोई भी व्यक्ति बफर जोन के जंगलों में घुसता है तो उसके खिलाफ भी कानूनी कार्रवाई की जाएगी।