- चालदा महासू देवता का प्रस्थान जून में होगा
संवाद न्यूज एजेंसी
साहिया। खत शैली के दोहा गांव में आयोजित हुई बैठक में सर्वसम्मति से सामाजिक मर्यादा व पारंपरिक रीति-रिवाजों से संबंधी निर्णय लिए गए। इनमें शादी-विवाह में शराब पर पूर्णत: पाबंदी लगाई गई। वहीं, महिलाएं केवल तीन गहनें (फुली, झुमकी और मंगलसूत्र) ही पहनेंगी। इसके साथ ही चालदा महासू देवता के प्रस्थान को जून माह में संपन्न कराने का फैसला लिया गया।
खत शैली के 25 गांवों के ग्रामीणों की बैठक में सामाजिक मान-मर्यादा को बनाए रखने व पारंपरिक रीति-रिवाजों के संरक्षण पर जोर दिया गया। सदर स्याणा राजेंद्र सिंह तोमर की अध्यक्षता में संपन्न हुई बैठक में ग्रामीणों ने चर्चा के बाद एकमत होकर नौ बिंदुओं पर सर्वसम्मति से निर्णय लिए। जिनमें सबसे पहले चालदा महासू देवता के कचटा प्रवास के लिए होने वाले मंदिर से प्रस्थान को जून माह में संपन्न कराए जाने का फैसला लिया गया। इसके साथ ही खत के गांवों में शादी विवाह में शराब और बीयर नहीं परोसी जाएगी।
ग्रामीणों ने कहा कि यदि कोई व्यक्ति इसका उल्लंघन करेगा तो उसपर एक लाख रुपये का जुर्माना लगाने के साथ खत के निवासी उसके किसी भी आयोजन में शामिल नहीं होंगे। इसी प्रकार से बारिया के जाग से संबंधी निर्णयों में मौखी के बकरा, आटा, चावल देने का प्रावधान रखा गया जबकि, मिठाई को प्रतिबंधित किया गया।
बेटियों के बकरा भेंट करने पर भी पूर्ण प्रतिबंध लागू किया गया। रोहिणी भोज में मिठाई और फल की अनुमति रहेगी, लेकिन सूखे मेवे, गिफ्ट पैकेट व चांदी का सिक्का देना प्रतिबंधित रहेगा। विवाह में चाऊमीन, मोमो, टिक्की और चाट जैसे फास्ट फूड पर पूर्ण रोक लगाई गई है।