संतों से पूछे बिना उत्तर प्रदेश शासन की ओर से अर्द्धकुंभ के स्नानों की घोषणा करने पर अखाड़ा परिषद सख्त नाराज हो गया है। चेतावनी दी यदि संतों की ऐसे ही उपेक्षा होती रही तो परिषद अर्द्धकुंभ स्नानों का बहिष्कार करेगी।
अखाड़ा परिषद के राष्ट्रीय महामंत्री श्रीमहंत हरि गिरि ने बताया कि कुंभ स्नानों की तिथि हर बार अखाड़ा परिषद से पूछकर घोषित की जाती है। इस बार उत्तर प्रदेश सरकार ने अचानक तारीखों की घोषणा कर दी। यह दुर्भाग्यपूर्ण है। वह भी तब जबकि प्रदेश का मुख्यमंत्री खुद संत हैं। अभी संतों ने अखाड़ों की बैठक कर मुहूर्त भी नहीं निकलवाया और शासन ने तिथियां तक घोषित कर दी।
तिथि घोषणा के समय संत जगत बाकायदा समारोह करता है। इस संबंध में अखाड़ा परिषद की बैठक शीघ्र बुलाई जा रही है। आगामी कदम का निर्णय प्रयाग में किया जाएगा। इधर, हरिद्वार के संतों को जब यह पता चला कि उन्हें जानकारी दिए बिना ही तारीख घोषित कर दी है तो उन्होंने इस पर अफसोस जताया।
शासन की ओर से घोषित तारीखों के अनुसार पहला अर्द्धकुंभ स्नान अगले वर्ष 14 जनवरी मकर संक्रांति को होगा। अंतिम स्नान चार मार्च महाशिवरात्रि के दिन होना है। इस बीच पौष पूर्णिमा, मौनी अमावस्या, वसंत पंचमी और माघी पूर्णिमा पर भी पवित्र स्नान होंगे।